Зулфи ту ба ҳар об мусаффо натавон шаст

زلف تو به هر آب مصفا نتوان شست

Ало ки ба хуноба дилҳо натавон шаст

الا که به خونابه دلها نتوان شست

Ҳар шаби ман ва аз гиряи сари кӯии ту шустан

هر شب من و از گریه سر کوی تو شستن

Бадбахтии ин дида ки он по натавон шаст

بدبختی این دیده که آن پا نتوان شست

Дарёи зи паии бахти бад аз дида чаҳ резам

دریا ز پی بخت بد از دیده چه ریزم

Чун бахти бади хеш ба дарё натавон шаст

چون بخت بد خویش به دریا نتوان شست

Ишқ аз дили мо кам натавон кард ки зотии сет

عشق از دل ما کم نتوان کرد که ذاتی ست

Чун мояи оташ ки з хоро натавон шаст

چون مایه آتش که ز خارا نتوان شست

Аз дардии хами шӯии мусаллои ман имшаб

از دردی خم شوی مصلای من امشب

Каз об дигар ин лата мо натавон шаст

کز آب دگر این لته ما نتوان شست

Нӯшем май ва бар сари худ ҷуръа фишонем

نوشیم می و بر سر خود جرعه فشانیم

Ҳар ҷой ки ҷуръа чакад онҷо натавон шаст

هر جای که جرعه چکد آنجا نتوان شست

эй дӯст , ба хусрав бирасон шарбати дардӣ

ای دوست، به خسرو برسان شربت دردی

Каз замзами каъбаи дами сагро натавон шаст

کز زمزم کعبه دم سگ را نتوان شست