Ҳамаи шаб аз ту ба девори хона ғам гӯям

همه شب از تو به دیوار خانه غم گویم

Фасона гӯям ва бо чашми пар занам гӯям

فسانه گویم و با چشم پر زنم گویم

Чу ғунчаи гашти дилами хӯну қиссаи ту зи рашк

چو غنچه گشت دلم خون و قصه تو ز رشک

Дилам нахост ки бо бод субҳдам гӯям

دلم نخواست که با باد صبحدم گویم

Ту худ яқинаст ки хуши гардӣ аз ғамам , лекин

تو خود یقینست که خوش گردی از غمم، لیکن

Куҷост давлати онам ки бо ту ғам гӯям ?

کجاست دولت آنم که با تو غم گویم؟

Хуши он шабӣ ки ту дар хоб ноз бошӣ ва ман

خوش آن شبی که تو در خواب ناز باشی و من

Ниёз хеш бидон зулфи хам ба хам гӯям

نیاز خویش بدان زلف خم به خم گویم

Сукӯни дилро гӯям « фалон аз он манаст »

سکون دل را گویم «فلان از آن من است »

Чунон агар чаҳ набошад , дурӯғ ҳам гӯям

چنان اگر چه نباشد، دروغ هم گویم

Ту он ки май диҳеми панд , бигузар аз сари ман

تو آن که می دهیم پند، بگذر از سر من

Ҳамон басаст ки ман дарди хеш кам гӯям

همان بس است که من درد خویش کم گویم

Ҳдси ҷони дижами прсдми ҳамаи кас ва ман

حدث جان دژم پرسدم همه کس و من

Ҳамаи ҳикояти он наргис дижам гӯям

همه حکایت آن نرگس دژم گویم

Махон ба қиблаам , эй порсо , равои дорӣ

مخوان به قبله ام، ای پارسا، روا داری

Ки ту ҳўоллаҳи гӯйӣ ва ман санам гӯям

که تو هوالله گویی و من صنم گویم

Маранҷ аз шағаб бе такаллуфи хусрав

مرنج از شغب بی تکلف خسرو

Сурӯд нест ки ӯро ба зер ва Бам гӯям

سرود نیست که او را به زیر و بم گویم