Баҳор омад , вале сарви гулистон чун тавон кардан
بهار آمد، ولی سرو گلستان چون توان کردن
Ки бе ёрони худ , ҳайфаст гашти бӯстон кардан ?
که بی یاران خود، حیف است گشت بوستان کردن؟
Гусастаи силки суҳбати дӯстонами боз ва ман зинда
گسسته سلک صحبت دوستانم باز و من زنده
Бад-ӣни хорӣ на аз роҳаст ёди дӯстон кардан
بدین خواری نه از راهست یاد دوستان کردن
Марои гӯйӣ « фаромӯшаш куну озоди шӯ аз ғам »
مرا گویی «فراموشش کن و آزاد شو از غم »
Мусулмонон , чунин рӯеи Фромш чун тавон кардан ?
مسلمانان، چنین رویی فرامش چون توان کردن؟
Бигӯянд он мусофирро ки сад пора шудаи ҷонаш
بگویند آن مسافر را که صد پاره شده جانش
Кам аз як номае каз ваии тавон пайванди ҷон кардан ?
کم از یک نامه ای کز وی توان پیوند جان کردن؟
Ба фитроки ту дили бандам , маро чун нест он панҷа
به فتراک تو دل بندم، مرا چون نیست آن پنجه
Ки битавонад турои дасти шафоат дар Аннан кардан
که بتواند ترا دست شفاعت در عنان کردن
Куҷоанд он ҳамаи мурғон ки рафтанд аз чаман , ёрб ?
کجااند آن همه مرغان که رفتند از چمن، یارب؟
Надонистанд , пиндоред , ёди ошён кардан
ندانستند، پندارید، یاد آشیان کردن
Биё то шукр ғам гӯйем , хусрави баъд аз ин , чу мо
بیا تا شکر غم گوییم، خسرو بعد از این، چو ما
Надонистем дар айёми шодии шукри он кардан
ندانستیم در ایام شادی شکر آن کردن