Имрӯзи бози шакли дигаргшти ёри ман
امروز باز شکل دگرگشت یار من
Ёдӣ накард аз ман ва аз рӯзгори ман
یادی نکرد از من و از روزگار من
Сад раҳи фитода бар раҳ хешам бидид ва ҳеҷ
صد ره فتاده بر ره خویشم بدید و هیچ
Раҳмат накард бар дили умедвори ман
رحمت نکرد بر دل امیدوار من
Мардум дар орзӯии канорӣу бахти бад
مردم در آرزوی کناری و بخت بد
Наниҳод орзӯии ман андари канори ман
ننهاد آرزوی من اندر کنار من
Умрам дар интизор шуд ва як дами он ҳариф
عمرم در انتظار شد و یک دم آن حریف
Наомад ки вой бар ман ва бар интизори ман !
نآمد که وای بر من و بر انتظار من!
Гуҳи оҳу гоҳи гиряу зорӣу гуҳи нафир
گه آه و گاه گریه و زاری و گه نفیر
Ёрб , куҷо шуд он ҳамаи сабру қарори ман ?
یارب، کجا شد آن همه صبر و قرار من؟
Гар ман ба кӯй май дувум аз баҳри як назар
گر من به کوی می دوم از بهر یک نظر
То ба ки гашт мезанад он шаҳсавори ман
تا به که گشت می زند آن شهسوار من
эй мардумон , ба Зуҳра ва ма бингаред , лек
ای مردمان، به زهره و مه بنگرید، لیک
Зинҳори мнгрид ба сӯйнигор ман
زنهار منگرید به سوی نگار من
Эзади каҷоти баҳри ҳалоки ман офарид
ایزد کجات بهر هلاک من آفرید
эй офати дили ману ошӯби кори ман
ای آفت دل من و آشوب کار من
Душман бидид гиряи хусрав , дилаш бсухт
دشمن بدید گریه خسرو، دلش بسوخت
Ҳаргиз нагуфтяш ки бас , эй дӯстдори ман
هرگز نگفتیش که بس، ای دوستدار من