Сарв ба дид он қаду раъное азон боло гирифт
سرو به دید آن قد و رعنایی ازان بالا گرفت
Дар чаманҳо лоҷарами кораш азон боло гирифт
در چمنها لاجرم کارش ازان بالا گرفت
Бо қадаш нисбат надорад қомати сарви баланд
با قدش نسبت ندارد قامت سرو بلند
Рост мегӯйем ва бар мо нест ин касро гирифт
راست می گوییم و بر ما نیست این کس را گرفت
Ҷузи ҳадиси тир ӯ дар дил намеояд маро
جز حدیث تیر او در دل نمی آید مرا
То хаёли он камони абрӯ ба чашмам ҷо гирифт
تا خیال آن کمان ابرو به چشمم جا گرفت
Ҳақи он қурси рух ва он лаб намедонад рақиб
حق آن قرص رخ و آن لب نمی داند رقیب
Хоҳад он нону намаки рӯзии ду чашмашро гирифт
خواهد آن نان و نمک روزی دو چشمش را گرفت
Ман ки печидам ба фикри он ду зулфи анбарин
من که پیچیدم به فکر آن دو زلف عنبرین
Оқибати зини фикр бе поёни маро савдо гирифт
عاقبت زین فکر بی پایان مرا سودا گرفت
Дӯш мегуфтам зи сӯзи дили ҳадисӣ бо чароғ
دوش می گفتم ز سوز دل حدیثی با چراغ
Дар сари шамъ оташ афтоду зи сар то гирифт
در سر شمع آتش افتاد و ز سر تا گرفت
Хсрўо , то ёфт мأўои ҷони мо дар кӯии дӯст
خسروا، تا یافت مأوا جان ما در کوی دوست
Шуд муқӣми он сари кӯу дилаш аз мо гирифт
شد مقیم آن سر کو و دلش از ما گرفت