Бас ки зулфи саркашат дар кори дилҳо дар нишаст
بس که زلف سرکشت در کار دلها در نشست
Ҳеҷ кас дар шаҳр аз ин савдоӣ бепоён нараст
هیچ کس در شهر از این سودای بی پایان نرست
Ошиқон гашта ба роҳати хок ва ман дар ғайритем
عاشقان گشته به راهت خاک و من در غیرتم
Кони ғубори ғайр бар домон ту хоҳад нишаст
کان غبار غیر بر دامان تو خواهد نشست
Ту суннат дар синаи ман наъл дар оташи ниҳод
تو سنت در سینه من نعل در آتش نهاد
Ҳаст аз онҷои оташӣ каз наъли икрони ту ҷуст
هست از آنجا آتشی کز نعل یکران تو جست
Сӯхтии ҷони мароу ҳоли ман пурсӣ ки чист
سوختی جان مرا و حال من پرسی که چیست
эй ъФоки аллоҳ , чаҳ гӯям ҷон ман ҳаст , он чаҳ ҳаст
ای عفاک الله، چه گویم جان من هست، آن چه هست
Обрӯии ман ки рафт аз ту , агар хӯн резем
آبروی من که رفت از تو، اگر خون ریزیم
Ҳам ба об рӯй покон ки нишуем аз ту даст
هم به آب روی پاکان که نشویم از تو دست
Сад ҳазор имзои дастури хирадро маҳв кард
صد هزار امضای دستور خرد را محو کرد
Зулфи ту ,гар омили длҳост ё хон шикаст
زلف تو، گر عامل دلهاست یا خوان شکست
Ман з хон худ хароб ва дар камӣни ҷони хаёл
من ز خوان خود خراب و در کمین جان خیال
Дузд кард он гирди коло , бодаи нӯши афтодаи маст
دزد کرد آن گرد کالا، باده نوش افتاده مست
Ваа ки кинаш буд бо хусрав ки аз хунаши бгшт
وه که کینش بود با خسرو که از خونش بگشت
Вази паии душворӣ ҷон канданаш аз ғамза хаст
وز پی دشواری جان کندنش از غمزه خست