Дӯши лаъли ту маро то ба саҳар меҳмон дошт

دوش لعل تو مرا تا به سحر مهمان داشت

Мурдаи ҳиҷри зи буии ту ҳамаи шаб ҷон дошт

مرده هجر ز بوی تو همه شب جان داشت

Рӯй ту дидам ва шуд дарди фаромӯши маро

روی تو دیدم و شد درد فراموش مرا

Сина каз новаки ҳиҷрат ба ҷигар пайкон дошт

سینه کز ناوک هجرت به جگر پیکان داشت

Дили ман ,гар чаҳ ба бедод шуд аз зулфи ту танг

دل من، گر چه به بیداد شد از زلف تو تنگ

Малик ӯ шуд ки зи султони рахт фармон дошт

ملک او شد که ز سلطان رخت فرمان داشت

Боз бо зулфи ту бдхў шуд ва инак пас азин

باز با زلف تو بدخو شد و اینک پس ازین

Дили девона ба занҷир нигаҳ натавон дошт

دل دیوانه به زنجیر نگه نتوان داشت

Сӯзиши сина ман дид ва канорам нагирифт

سوزش سینه من دید و کنارم نگرفت

Ки ҳануз ин тани бади рӯзи таб ҳиҷрон дошт

که هنوز این تن بد روز تب هجران داشت

эй ки гӯйии ту ки дар пеши санами саҷда чаҳ шуд

ای که گویی تو که در پیش صنم سجده چه شد

Ин бидон гӯй ки он дами хабар аз имон дошт

این بدان گوی که آن دم خبر از ایمان داشت

Ҷон ки аз кӯй ту бигурехт шабаши хуши бодо

جان که از کوی تو بگریخت شبش خوش بادا

Ҷой ӯ ёри нигаҳдошт ки ҷой он дошт

جای او یار نگهداشت که جای آن داشت

Назарӣ кардаму дуздидаи маро ҷон бахшед

نظری کردم و دزدیده مرا جان بخشید

Каз рақибони хунаки дуздии ман пинҳон дошт

کز رقیبان خنک دزدی من پنهان داشت

Хусрави имшаби шарафи бандагӣ ҷонон ёфт

خسرو امشب شرف بندگی جانان یافت

Магаси имрӯзи сари моидаҳ султон дошт

مگس امروز سر مایده سلطان داشت