Умр ба поён расед дар ҳавас рӯй дӯст
عمر به پایان رسید در هوس روی دوست
Барги сабурии крост бе рухи некӯии дӯст
برگ صبوری کراست بی رخ نیکوی دوست
Гар ҳама олам шаванд мункири мо , гӯ , шавед
گر همه عالم شوند منکر ما، گو، شوید
Давр нахоҳем шуд мо зи сари кӯии дӯст
دور نخواهیم شد ما ز سر کوی دوست
Қиблаи исломёни каъба буд дар ҷаҳон
قبله اسلامیان کعبه بود در جهان
Қибла ушшоқ нест ҷузи хами абрӯии дӯст
قبله عشاق نیست جز خم ابروی دوست
эй нафаси субҳдам , гар наҳй онҷои қадам
ای نفس صبحدم، گر نهی آنجا قدم
Хастаи диламро биҷӯ дар шикани мӯии дӯст
خسته دلم را بجو در شکن موی دوست
Ҷони бФшонми зи шавқ дар раҳи боди сабо
جان بفشانم ز شوق در ره باد صبا
Гар бирасонад ба мо субҳдамии буии дӯст
گر برساند به ما صبحدمی بوی دوست
Рӯзи қиёмат ки халқ рӯй ба ҳар сӯ кунанд
روز قیامت که خلق روی به هر سو کنند
Хусрав мискин накард майл ба ҷузи сӯии дӯст
خسرو مسکین نکرد میل به جز سوی دوست