Лашкар кашид ишқу дилами тарк ҷон гирифт
لشکر کشید عشق و دلم ترک جان گرفت
Сабри гурези пои сари андар ҷаҳон гирифт
صبر گریز پای سر اندر جهان گرفت
Гуфтӣ ки тарк ман куну озоди шӯи зи ғам
گفتی که ترک من کن و آزاد شو ز غم
Осон ба тарки ҳамчуи туе чун тавон гирифт
آسان به ترک همچو تویی چون توان گرفت
эй ошно ки гиряи кунони панд май диҳӣ
ای آشنا که گریه کنان پند می دهی
Об аз буруни марез ки оташ ба ҷон гирифт
آب از برون مریز که آتش به جان گرفت
Назора ҳам накард гуҳ сӯхтани маро
نظاره هم نکرد گه سوختن مرا
Он кас ки оташам зад ва аз ман карон гирифт
آن کس که آتشم زد و از من کران گرفت
Дар тавқ бндгиш равад дил ба оқибат
در طوق بندگیش رود دل به عاقبت
Ҳар фохта ки хизмати сарв равон гирифт
هر فاخته که خدمت سرو روان گرفت
Акнӯн ки тозӣона ҳиҷрон кашид дил
اکنون که تازیانه هجران کشید دل
Ҷони рамидаро ки тавонад Аннан гирифт ?
جان رمیده را که تواند عنان گرفت؟
Хусрав каз ӯст ташнаи шамшери обдор
خسرو کز اوست تشنه شمشیر آبدار
зи оташ чаҳ ғам ки душманаши андар забон гирифт
ز آتش چه غم که دشمنش اندر زبان گرفت