Замонаи ҳалаи нави баст рӯй саҳро ро

زمانه حله نو بست روی صحرا را

Кашид дил ба чамани лаъибатони раъно ро

کشید دل به چمن لعبتان رعنا را

Ҳавои гули зи хушӣ ёд медиҳад , лекин

هوای گل ز خوشی یاد می دهد، لیکن

Чаҳ суд чун ту Фромш наме шӯии мо ро

چه سود چون تو فرامش نمی شوی ما را

зи сарви бустони чандин чаҳ май пурди булбул

ز سرو بستان چندین چه می پرد بلبل

Магар надид ҷавонони сарви боло ро

مگر ندید جوانان سرو بالا را

Чу май хурӣ ба серум низ ҷуръа май рез

چو می خوری به سرم نیز جرعه می ریز

Ки мардумӣ набӯд бодаи нӯш танҳо ро

که مردمی نبود باده نوش تنها را

Фурухтам ба яке ҷуръаи ганҷи ақл , оре

فروختم به یکی جرعه گنج عقل، آری

Шробхўораҳ набинад касоди коло ро

شرابخواره نبیند کساد کالا را

Насими боди сабо аз барои ҷилваи боғ

نسیم باد صبا از برای جلوه باغ

Кашид бар рухи рангини ҳарири дебо ро

کشید بر رخ رنگین حریر دیبا را

Замини зи сабзаи рангин ба чарх ме монад

زمین ز سبزه رنگین به چرخ می ماند

Ба тори мӯии бёўихти ҷони аъдо ро

به تار موی بیاویخت جان اعدا را

зи фари мадҳи ту сад миннатаст бар хусрав

ز فر مدح تو صد منت است بر خسرو

Замири мадҳи сароу забон гуё ро

ضمیر مدح سرا و زبان گویا را