Дилам бурун шуд аз ғамат , ғамати зи дил бурун нашуд

دلم برون شد از غمت، غمت ز دل برون نشد

Забун шудам ки буд кӯи зи дасти ғам забун нашуд

زبون شدم که بود کو ز دست غم زبون نشد

Ба ҷилваи гоҳи некӯон ки ҳаст ҷилваи бало

به جلوه گاه نیکوان که هست جلوه بلا

Касе дарун парда шуд ки аз бало бурун нашуд

کسی درون پرده شد که از بلا برون نشد

зи оби чашми ошиқони куҷои зи дида тар кунад

ز آب چشم عاشقان کجا ز دیده تر کند

зи шухии шакарлабони дил касе ки хӯн нашуд

ز شوخی شکرلبان دل کسی که خون نشد

Чаҳ нолаҳо ки кард дил ки ёр аз он худ кунад

چه ناله ها که کرد دل که یار از آن خود کند

Рухи никуии маро чаҳ ҳиялатаст чун нашуд ?

رخ نکویی مرا چه حیلت است چون نشد؟

Чу мурданӣ шудам зи ғам , чаҳ ҷӯям аз касе дуо ?

چو مردنی شدم ز غم، چه جویم از کسی دعا؟

Ки аз дуои мардумони ҳаёти кас фузун нашуд

که از دعای مردمان حیات کس فزون نشد

Надонам ин ки чун зем , ҳаёти дили чисон буд ?

ندانم این که چون زیم، حیات دل چسان بود؟

зи ҷодуӣ ки хусрав аз дилат ба сад фусун нашуд

ز جادویی که خسرو از دلت به صد فسون نشد