Чу моҳи рӯза аз авҷ само шуд
چو ماه روزه از اوج سما شد
зи нури рӯзаи даврон безё шуд
ز نور روزه دوران بی ضیا شد
Бар абрӯии ҳилол ид бингар
بر ابروی هلال عید بنگر
Ҳилоли абрӯам аз ман ҷудо шуд
هلال ابروم از من جدا شد
Азон обӣ ки бигузашт аз сари хам
ازان آبی که بگذشت از سر خم
Пиёла бо суроҳе ошно шуд
پیاله با صراحی آشنا شد
Марои коби ду чашм аз саргузаштаи сет
مرا کاب دو چشم از سرگذشته ست
Аҷаб бингар ки гули бод сабо шуд
عجب بنگر که گل باد صبا شد
Гулашро сабзаи норуста гё раст
گلش را سبزه نارسته گیا رست
Чунон мардуми магари мардум гё шуд
چنان مردم مگر مردم گیا شد
Азон миҳроби абрӯ ёд кардам
ازان محراب ابرو یاد کردم
Намозӣ чанд низ аз ман қазо шуд
نمازی چند نیز از من قضا شد
Магари маҷнӯни шиносад , ҳол ман чист ?
مگر مجنون شناسد، حال من چیست؟
Ки дар ҳиҷрони Лайлӣ мубтало шуд
که در هجران لیلی مبتلا شد
Ҳамаи гул май дамад аз дида дар чашм
همه گل می دمد از دیده در چشم
Хаёл рӯй ӯ моро бало шуд
خیال روی او ما را بلا شد
Дар оби дидаи саргардон чаҳ мондаи сет ?
در آب دیده سرگردان چه مانده ست؟
Магари сангини дили ман ошно шуд
مگر سنگین دل من آشنا شد
Ду чашми хусрав аз боридан дар
دو چشم خسرو از باریدن در
Кафи шоҳаншаҳи борон ато шуд
کف شاهنشه باران عطا شد