Дилами ҷузи кӯии ту маскан надонад

دلم جز کوی تو مسکن نداند

Тамошои гул ва гулшан надонад

تماشای گل و گلشن نداند

Ҳар он назорагии кон рӯй бинад

هر آن نظارگی کان روی بیند

Ба пои худ раҳ маскан надонад

به پای خود ره مسکن نداند

Ба ҳар чашмӣ дареғаст он чунон рӯй

به هر چشمی دریغ است آن چنان روی

Ки номаҳрам дар ӯ дидан надонад

که نامحرم در او دیدن نداند

Чу ҷуръаи рехти ҳиҷрони хӯни ман , вой

چو جرعه ریخت هجران خون من، وای

Ки он соқии мард аФгн надонад

که آن ساقی مرد افگن نداند

Гар он бадахшамро дарёбӣ , эй бод

گر آن بدخشم را دریابی، ای باد

Бигӯе ончунон каз ман надонад

بگویی آنچنان کز من نداند

Фурӯи хури оҳро , эй ҷон ва май сӯз

فرو خور آه را، ای جان و می سوز

Ки дӯди мо раҳ равзан надонад

که دود ما ره روزن نداند

Бирав , эй сар , ту ҳам бо ақли дилгир

برو، ای سر، تو هم با عقل دلگیر

Ки мо мастему ақли ин фан надонад

که ما مستیم و عقل این فن نداند

Ҳадиси дард бо афсурдагон нест

حدیث درد با افسردگان نیست

Ки ин раҳи дили шиносад , тан надонад

که این ره دل شناسد، تن نداند

Худоё , дӯсти комаши дор , ҳар чанд

خدایا، دوست کامش دار، هر چند

Ки дарди хусрави он душман надонад

که درد خسرو آن دشمن نداند