Ғамза ҳоӣ кард чашмаш бо дили ин номурод
غمزه هایی کرد چشمش با دل این نامراد
Боз аз доли ду зулфами он алиф қад дод ёд
باز از دال دو زلفم آن الف قد داد یاد
Гуфта будам умрҳои эътимодам бо ту буд
گفته بودم عمرهای اعتمادم با تو بود
Ин замон донистам , эй ҷон , нест бар умри эътимод
این زمان دانستم، ای جان، نیست بر عمر اعتماد
Ҳарф мем омад даҳонат , ҳаст алифи ангушти ту
حرف میم آمد دهانت، هست الف انگشت تو
Ҷузи ту кас бар мо чаро ангушти натавонади ниҳод ?
جز تو کس بر ما چرا انگشت نتواند نهاد؟
Бо насим субҳ додам дил ки бар дар пеш ӯ
با نسیم صبح دادم دل که بر در پیش او
Дод булбул дар ҳавои гулбунии дилро ба ёд
داد بلبل در هوای گلبنی دل را به یاد
Аз рахти ҷони парварии омухти лаълат , офарин
از رخت جان پروری آموخت لعلت، آفرین
Шуд дарин фани оқибати шогирди беҳтари зи Авестоад
شد درین فن عاقبت شاگرد بهتر ز اوستاد
Ҷон хусрав ҳаст чашму ғамзаи ошиқи кашиш
جان خسرو هست چشم و غمزه عاشق کشش
Ишқ ҷон бозӣаст , ёрону азизон , хайри бод !
عشق جان بازیست، یاران و عزیزان، خیر باد!