Ҳаркасии рӯзи видоъ аз пай маҳмил ме шуд

هرکسی روز وداع از پی محمل می‌شد

Ту мапиндор ки он дилбарам аз дил ме шуд

تو مپندار که آن دلبرم از دل می‌شد

Ҳеҷ манзил нашавад қофила аз оби ҷудо

هیچ منزل نشود قافله از آب جدا

Зон ки пеш аз ҳамаи сайлоб ба манзил ме шуд

زان که پیش از همه سیلاب به منزل می‌شد

Гуфтам , аз маҳмили он ҷони ҷаҳони баргардам

گفتم، از محمل آن جان جهان برگردم

Поем аз хӯни дили сӯхта дар гул ме шуд

پایم از خون دل سوخته در گل می‌شد

Сорибони хайма ба саҳро зад ва инам аҷаб аст

ساربان خیمه به صحرا زد و اینم عجب است

Ки қиёмат нашуд он рӯз ки маҳмил ме шуд

که قیامت نشد آن روز که محمل می‌شد

Ростӣ ҳар ки дар он шакл ва шамоил ме дид

راستی هر که در آن شکل و شمایل می‌دید

Ҳамчуи ман фитна дар он шакл ва шамоил ме шуд

همچو من فتنه در آن شکل و شمایل می‌شد

Панд оқил накунад суд ки дар банди фироқ

پند عاقل نکند سود که در بند فراق

Дил девона надидем ки оқил ме шуд

دل دیوانه ندیدیم که عاقل می‌شد

Бигузар аз хеш ки бе табъи масолик , хусрав

بگذر از خویش که بی‌طبع مسالک، خسرو

Ҳеҷ солик нашунидем ки восил ме шуд

هیچ سالک نشنیدیم که واصل می‌شد