Рӯй накӯ бевуҷӯд ноз набошад
روی نکو بی وجود ناز نباشد
Ноз чаҳ арзад , агар ниёз набошад
ناز چه ارزد، اگر نیاز نباشد
Роҳи ҳиҷоз , ар умеди васл тавон дошт
راه حجاز، ار امید وصل توان داشت
Бар қадами раҳравон дароз набошад
بر قدم رهروان دراز نباشد
Маст май ишқро намози мФрмоӣ
مست می عشق را نماز مفرمای
Кон ки бимирад бар ӯ намоз набошад
کان که بمیرد بر او نماز نباشد
Мутриби дстонсрои маҷлиси мо ро
مطرب دستانسرای مجلس ما را
Сӯз буд ,гар чаҳ ҳеҷ соз набошад
سوز بود،گر چه هیچ ساز نباشد
Банда чу Маҳмӯд шуд , хамӯш ки султон
بنده چو محمود شد، خموش که سلطان
Дар раҳи маънӣ ба ҷуз Аёз набошад
در ره معنی به جز ایاز نباشد
Ҳайф буд майли шаҳ ба хӯни гадоён
حیف بود میل شه به خون گدایان
Сайди малахи кор шоҳбоз набошад
صید ملخ کار شاهباز نباشد
Пеши касоне ки соҳибон ниёзанд
پیش کسانی که صاحبان نیازند
Ҳеҷ тнъми вароӣ ноз набошад
هیچ تنعم ورای ناز نباشد
Хотири мардум ба лутфи сайд тавон кард
خاطر مردم به لطف صید توان کرد
Дили набард , ҳар ки длнўоз набошад
دل نبرد، هر که دلنواز نباشد
Кас мутасаввир намешавад ки чу хусрав
کس متصور نمی شود که چو خسرو
Ҳиндӯии он чашм трктоз набошад
هندوی آن چشم ترکتاز نباشد