эй аз фурӯғ рӯй ту хуршеди рӯи сифед

ای از فروغ روی تو خورشید رو سفید

Шабро ба ҷанби турра ту гашта мӯи сифед

شب را به جنب طره تو گشته مو سفید

Хат бар меар то нашавад рӯзи мо сиёҳ

خط بر میار تا نشود روز ما سیاه

Он рӯй дар хураст чунон бош кӯи сифед

آن روی در خور است چنان باش کو سفید

Бо ман чу вақти субҳ чунин гуфт шаб ки мо

با من چو وقت صبح چنین گفت شب که ما

Кардем мӯӣ дар ҳавас рӯй ӯ сифед

کردیم موی در هوس روی او سفید

Умрии ҳавои зулф ту пухтему оқибат

عمری هوای زلف تو پختیم و عاقبت

Кардем мӯии хеши дарин орзӯи сифед

کردیم موی خویش درین آرزو سفید

Дар орзӯии онкии ҷавонӣ буд муқӣм

در آرزوی آنکه جوانی بود مقیم

Бисёр кардаем дарин фикри мӯи сифед

بسیار کرده ایم درین فکر مو سفید

Ҷуз дар хтоу ҳинди баёзи саводи ман

جز در ختا و هند بیاض سواد من

Хусрави миёни назми сиёҳии мҷуи сифед

خسرو میان نظم سیاهی مجو سفید