Чашми ту хуфтаи ист ки дар хоб ме равад

چشم تو خفته ایست که در خواب می رود

Зулфи ту офатии сет ки дар тоб ме равад

زلف تو آفتی ست که در تاب می رود

Ҳиндӯии сунбули ту чаҳ дузд диловараст ?

هندوی سنبل تو چه دزد دلاور است؟

Кӯи шаб ба равшаноӣ маҳтоб ме равад

کو شب به روشنایی مهتاب می رود

Ҳар дами зи шӯри пистаи ширини ту маро

هر دم ز شور پسته شیرین تو مرا

Домани пар аз сиришк чу унноб ме равад

دامن پر از سرشک چو عناب می رود

Гаштам дар оби дидаи чунон ғарқ кин замон

گشتم در آب دیده چنان غرق کاین زمان

Сад найзаи бартар аз сари ман об ме равад

صد نیزه برتر از سر من آب می رود

Соқии Аннани саркаш гулгун кашида дор

ساقی عنان سرکش گلگون کشیده دار

Кин бодпои умр ба аштоб ме равад

کاین بادپای عمر به اشتاب می رود

Моро зи тоқи абрӯии ҷонон гурез нест

ما را ز طاق ابروی جانان گریز نیست

Зоҳид агар ба гӯша миҳроб ме равад

زاهد اگر به گوشه محراب می رود

Хусрав чу гашти мӯътакифи остони дӯст

خسرو چو گشت معتکف آستان دوست

Ҳаргиз ба таъни душмани азин боб меравад ?

هرگز به طعن دشمن ازین باب می رود؟