Дил рафту орзӯии ту аз дил наме шавад

دل رفت و آرزوی تو از دل نمی‌شود

Дили пораи гашту дарди ту зоӣл наме шавад

دل پاره گشت و درد تو زائل نمی‌شود

Ма мешавад муқобил рӯй ту ҳар шабӣ

مه می‌شود مقابل روی تو هر شبی

Як рӯз бо рухи ту муқобил наме шавад

یک روز با رخ تو مقابل نمی‌شود

Рӯем зараст ва бар дар ту хок ме кунам

رویم زر است و بر در تو خاک می‌کنم

Васл ту кимиёст ки ҳосил наме шавад

وصل تو کیمیاست که حاصل نمی‌شود

Шуд ашки ман ҳамоили гардуни зи дасти ту

شد اشک من حمایل گردون ز دست تو

Дастам ба гардани ту ҳамоил наме шавад

دستم به گردن تو حمایل نمی‌شود

Бинишастаам ба ғам ки зи ишқи ту хостн

بنشسته‌ام به غم که ز عشق تو خاستن

Бо онкии ҷон ҳаме шавадам , дил наме шавад

با آنکه جان همی‌شودم، دل نمی‌شود

Дили манзил ғам омад ва аз раҳзанони ҳиҷр

دل منزل غم آمد و از رهزنان هجر

Як корвони сабр ба манзил наме шавад

یک کاروان صبر به منزل نمی‌شود

Хусрав дар аўФтод ба ғарқоби орзӯ

خسرو در اوفتاد به غرقاب آرزو

Чун киштии мурод ба соҳил наме шавад

چون کشتی مراد به ساحل نمی‌شود