Гуфтӣ дилат маро шуд ва аз ман ҷудо нашуд
گفتی دلت مرا شد و از من جدا نشد
Гӯи шӯ аз он ҳар ки шавад ,гар маро нашуд
گو شو از آن هر که شود، گر مرا نشد
Хуршеди ман хаёли ту аз ман гуҳӣ нарафт
خورشید من خیال تو از من گهی نرفت
Монанди соя эй ки зи мардум ҷудо нашуд
مانند سایه ای که ز مردم جدا نشد
Рӯзӣ сабо нарафт ба Кувайт ки ҳрдмӣ
روزی صبا نرفت به کویت که هردمی
Сад ҷони поки ҳамраҳи бод сабо нашуд
صد جان پاک همره باد صبا نشد
Пурсӣ маро ки аз чаҳ чунин мубтало шудӣ ?
پرسی مرا که از چه چنین مبتلا شدی؟
Он кист кӯи бад-ӣни туро мубтало нашуд ?
آن کیست کو بدین ترا مبتلا نشد؟
Бисёр доштами дили ободро хароб
بسیار داشتم دل آباد را خراب
Моно раҳо шавад тапиши ман , раҳо нашуд
مانا رها شود تپش من، رها نشد
Дар гардани ман , он ҳамаи хӯнҳо ки ме кунад
در گردن من، آن همه خونها که می کند
Хўнризи мо ки ҳеҷ хадангаш хато нашуд
خونریز ما که هیچ خدنگش خطا نشد
Дай гарм ронад Рахши басии дидаи хоки гашт
دی گرم راند رخش بسی دیده خاک گشت
Бадбахтем ки чашми маниши зер по нашуд
بدبختیم که چشم منش زیر پا نشد
Кардам миёни хӯни ҷигари ошнои басӣ
کردم میان خون جگر آشنا بسی
Кони ошнои хӯни дилам ошно нашуд
کان آشنای خون دلم آشنا نشد
Чашм висол нест дар ин чун ризои дӯст
چشم وصال نیست در این چون رضای دوست
Шаки худо ки ҳоҷати хусрав раво нашуд
شک خدا که حاجت خسرو روا نشد