Ҳар гоҳи мурғӣ аз сари шохӣ наво занад
هر گاه مرغی از سر شاخی نوا زند
Ояд ба дил касеу раҳи ҷон мо занад
آید به دل کسی و ره جان ما زند
Фарёд аз он дилӣ ки ба фарёд ҳар шабӣ
فریاد از آن دلی که به فریاد هر شبی
Нолш ба дард аз он сари зулфи ду то занад
نالش به درد از آن سر زلف دو تا زند
Неи нағмаи тараб ки буд арғунуни марг
نی نغمه طرب که بود ارغنون مرگ
Мурғӣ ки дар шиканҷаи домӣ наво занад
مرغی که در شکنجه دامی نوا زند
эй фохта , знолаҳи зани оташ ба бӯстон
ای فاخته، زناله زن آتش به بوستان
Каз гул умед нест ки буи вафо занад
کز گل امید نیست که بوی وفا زند
ӯ дар хирому дида ба роҳаш , чаҳ кам шавад ?
او در خرام و دیده به راهش، چه کم شود؟
Гар аз туфайли санги раҳати пушт по занад
گر از طفیل سنگ رهت پشت پا زند
Бе хости оҳӣ аз дил ман мезанад , битарс
بی خواست آهی از دل من می زند، بترس
Кин тир ногирифта надонам куҷо занад ?
کاین تیر ناگرفته ندانم کجا زند؟
эй пндгўӣ , шефтаро чун намонад санг
ای پندگوی، شیفته را چون نماند سنگ
Халқии раҳои куниш ки кулӯх ҷафо занад
خلقی رها کنش که کلوخ جفا زند
Хусрави зи рашки ғайр ба ҷон мерасад , балӣ
خسرو ز رشک غیر به جان می رسد، بلی
Хезади қиёматӣ чу гадо бар гадо занад
خیزد قیامتی چو گدا بر گدا زند