Чу тарки масти ман олӯдаи шароби даройад

چو تُرک مست من آلوده‌ی شراب درآید

зи шӯр ӯ намакӣ дар дили кабоби даройад

ز شور او نمکی در دل کباب درآید

Лабаш агар кашадам дар суоли бӯса , натарсам

لبش اگر کِشدم در سوال بوسه، نترسم

Валек ғамзаи мабодо ки дар итоби даройад

ولیک غمزه مبادا که در عتاب درآید

Биё ки зоҳиди хушк ар шабят маст биёбад

بیا! که زاهد خشک ار شبی‌ت مست بیابد

Ба ҷуръа тар кунад он зуҳд ва дар шароби даройад

به جرعه تر کند آن زهد و در شراب درآید

Ба гирди дидаи худ хорбстӣ аз мижа кардам

به گِرد دیده‌ی خود خاربستی از مژه کردم

Ки неи хаёли ту берун равад на хоб дар ояд

که نی خیال تو بیرون رود، نه خواب درآید

Гуҳӣ ки рӯй ба девори баҳри рози ту орм

گهی که روی به دیوار بهر راز تو آرم

Ъмортист ки андари дили хароби даройад

عمارتی‌ست که اندر دل خراب درآید

Сар аз дарича бурун кардае , бсухтам охир

سر از دریچه برون کرده‌ای، بسوختم، آخر

Раҳо макун ки дар он равзани офтоби даройад

رها مکن که در آن روزن آفتاب درآید

Каҷаст тири мижа , рост май занӣ ба дили ман

کج است تیر مژه، راست می‌زنی به دل من

Ки тири каҷ чу ба оташ расад ба тоби даройад

که تیر کج چو به آتش رسد به تاب درآید

зи баҳр дидани Ҳиндӯстони зулфи ту ҳар шаб

ز بهر دیدن هندوستانِ زلف تو هر شب

Биё бибин ки зи сайлоби чашми оби даройад

بیا ببین که ز سیلاب چشم، آب درآید

зи гиря дар ғами рӯят ба чашми хусрави бедил

ز گریه در غم رویت به چشم خسرو بیدل

Намонад об агар , бӯ ки хӯни ноби даройад

نماند آب اگر، بو که خون ناب درآید