Маро ба субҳи азали ҷузи рахт далел набӯд
مرا به صبح ازل جز رخت دلیل نبود
Ба гоҳ омаданами ҷуз ба ту сиблат набӯд
به گاه آمدنم جز به تو سبیل نبود
Чунон ба зӯри видоъаши зи дида сайл омад
چنان به زور وداعش ز دیده سیل آمد
Ки ҳамРаҳон марои ҳамраҳ раҳил набӯд
که همرهان مرا همره رحیل نبود
Гумон мабар ки шавад гул ба саъии каси оташ
گمان مبر که شود گل به سعی کس آتش
Ки аз ҷалил бидон лутф , аз халил набӯд
که از جلیل بدان لطف، از خلیل نبود
Ба қатлгоҳи шаҳидон ишқ бигузаштам
به قتلگاه شهیدان عشق بگذشتم
Яке ба ғамзаи таркон чу ман қтил набӯд
یکی به غمزه ترکان چو من قتیل نبود
Басӣ ба муждаи васли ту дида сим фишонд
بسی به مژده وصل تو دیده سیم فشاند
Валек рӯзи висолаш ба ҷуз қалил набӯд
ولیک روز وصالش به جز قلیل نبود
Магари зи шарми лаби лаъл ёр шуд бе об
مگر ز شرم لب لعل یار شد بی آب
Вагарнаи мардуми чашмами чунин бахил набӯд
وگرنه مردم چشمم چنین بخیل نبود
Ба ташнагони сдоъи хумори бргўиид
به تشنگان صداع خمار برگویید
Ки дӯши бодаи мо кам з слсбил набӯд
که دوش باده ما کم ز سلسبیل نبود
Ҳадиси лиззати хурмои з мо мапурс ки ҳеҷ
حدیث لذت خرما ز ما مپرس که هیچ
Бғири хори насибам аз он нахайл набӯд
بغیر خار نصیبم از آن نخیل نبود
Мудоми хусрав аз он ҷом май наад дар пеш
مدام خسرو از آن جام می نهد در پیش
Ки ҳеҷ оинаи ҷузи ҷом месқил набӯд
که هیچ آینه جز جام می صقیل نبود