Намози шом ки он маи маро ҷамол намӯд

نماز شام که آن مه مرا جمال نمود

зи нақши абрӯи девонаро ҳилол намӯд

ز نقش ابرو دیوانه را هلال نمود

зи бас ки рӯзу шабам дар хаёли инам кишт

ز بس که روز و شبم در خیال اینم کشت

Ки шаби гузашт ба пешу маро хаёл намӯд

که شب گذشت به پیش و مرا خیال نمود

Надонамаш зи куҷои пурсиш дилам ме кард

ندانمش ز کجا پرسش دلم می کرد

Давиди гиряи хунини зи чашм ва ҳол намӯд

دوید گریه خونین ز چشم و حال نمود

Дилами бабрад , гирифтам ки дузд дил бинмо

دلم ببرد، گرفتم که دزد دل بنما

Ба нози ханда дуздида кард ва хол намӯд

به ناز خنده دزدیده کرد و خال نمود

зи ҳоли гум шудагон дараш хабари ҷустам

ز حال گم شدگان درش خبر جستم

Ба хоки раҳи хасу хошок поймол намӯд

به خاک ره خس و خاشاک پایمال نمود

Рақиб гуфт ки ёд ту мекунад гуҳи гоҳ

رقیب گفت که یاد تو می کند گه گاه

Марои зи бахти бади хештан маҳол намӯд

مرا ز بخت بد خویشتن محال نمود

Туро ба хоби тнъм чаҳ огаҳӣ зон шаб ?

ترا به خواب تنعم چه آگهی زان شب؟

Ки дар фироқи ту хотири ҳазор сол намӯд

که در فراق تو خاطر هزار سال نمود

Навиди теғи сиёсати з чун ту султонӣ

نوید تیغ سیاست ز چون تو سلطانی

Саодатии сет ки дарвеш роҷмол намӯд

سعادتی ست که درویش راجمال نمود

Назора ту зад оташ ба ҷони хусрав , аз онк

نظاره تو زد آتش به جان خسرو، از آنک

зи даври ташнаи тафтидаро зулол намӯд

ز دور تشنه تفتیده را زلال نمود