Ёри моро аз он хеш нашуд

یار ما را از آن خویش نشد

Баҳри бедод ӯ ба кеш нашуд

بهر بیداد او به کیش نشد

Дӯш дар поши дида май судам

دوش در پاش دیده می سودم

Пош озурду дида риш нашуд

پاش آزرد و دیده ریش نشد

Май даҳуми ҷон ба ишқ ва ме донам

می دهم جان به عشق و می دانم

Ки касеро аз он хеш нашуд

که کسی را از آن خویش نشد

Аз ту маҳрӯм май рӯм , чаҳ кунам ?

از تو محروم می روم، چه کنم؟

Умри рӯзӣу аҳд беш нашуд

عمر روزی و عهد بیش نشد

Снмо , ғамзаи ту қассобии сет

صنما، غمزه تو قصابی ست

Ки пушаймони зи хӯн мяш нашуд

که پشیمان ز خون میش نشد

То ба рӯй ту чашм кардам боз

تا به روی تو چشم کردم باز

Ҳам ба рӯят ки беш беш нашуд

هم به رویت که بیش بیش نشد

Дили хусрав ки аз қарор бирафт

دل خسرو که از قرار برفت

Бар қарори нахуст пеш нашуд

بر قرار نخست پیش نشد