Субҳи пеши рухи ту дам назанад

صبح پیش رخ تو دم نزند

Сарви пеши қидмат қадам назанад

سرو پیش قدمت قدم نزند

Нақш ширинат бинад ар шопӯр

نقش شیرینت بیند ار شاپور

Гар чаҳ теғаши занӣ қалам назанад

گر چه تیغش زنی قلم نزند

Хизри пеши лабат ба оби ҳаёт

خضر پیش لبت به آب حیات

Лаб чаҳ бошад ки даст ҳам назанад

لب چه باشد که دست هم نزند

?наргаст чун сипоҳ ғамза кашад

نرگست چون سپاه غمزه کشد

Ақли ҷузи хайма дар адам назанад

عقل جز خیمه در عدم نزند

Сари ману остони ту , ҳар чанд

سر من و آستان تو، هر چند

Ки мусулмон дар санам назанад

که مسلمان در صنم نزند

Танам аз бори ишқи ту хам шуд

تنم از بار عشق تو خم شد

Кист каз бори ишқ хам назанад

کیست کز بار عشق خم نزند

Сабр кам мезанад қадами зини сӯй

صبر کم می زند قدم زین سوی

Инчунин кӯ ки пой кам назанад

اینچنین کو که پای کم نزند

Чашм май зани зи дида бар хусрав

چشم می زن ز دیده بر خسرو

Ки ба шаби пилки худ баҳам назанад

که به شب پلک خود بهم نزند