Агар зи ҷониби мо зиллат ва ниёз набошад
اگر ز جانب ما ذلت و نیاز نباشد
Ҷамол рӯй турои ҳеҷ ъз ва ноз набошад
جمال روی ترا هیچ عز و ناز نباشد
зи сӯзи ошиқ бечорааст сози ҷамолат
ز سوز عاشق بیچاره است ساز جمالت
Ҷамолро агар он сӯз нест соз набошад
جمال را اگر آن سوز نیست ساز نباشد
Ба пеши нози тугар мо наёварем ниёзӣ
به پیش ناز تو گر ما نیاوریم نیازی
Миёни ошиқу маъшӯқ имтиёз набошад
میان عاشق و معشوق امتیاز نباشد
Бъшқи мо бтрзи ҷамоли ҳасани ту доим
بعشق ما بطرز جمال حسن تو دائم
Либоси ҳасани туро ба аз ин тароз набошад
لباس حسن ترا به از این طراز نباشد
Куҷо шавад бҳқиқти аёни ҷамоли ҳақиқат
کجا شود بحقیقت عیان جمال حقیقت
Агар мазоҳири ойӣна муҷоз набошад
اگر مظاهر آیینه مجاز نباشد
Мҷўӣ дар дили мо ғайри дӯст зонка наёбӣ
مجوی در دل ما غیر دوست زانکه نیابی
Аз онкии дрдли Маҳмӯди ҷуз Аёз набошад
از آنکه دردل محمود جز ایاز نباشد
Навозишӣ натавон аз кас дигар талабидан
نوازشی نتوان از کس دگر طلبیدن
Агрчнончаҳи длором ва длнўоз набошад
اگرچنانچه دلارام و دلنواز نباشد
Барои ин дили бечораи мағрибӣ ту бигӯ
برای این دل بیچاره مغربی تو بگو
Чаҳ чораи созам агар ёри чора соз набошад
چه چاره سازم اگر یار چاره ساز نباشد