Он шукри ханда ба васл , даҳанам шод накард
آن شکر خنده به وصل، دهنم شاد نکرد
Ғалатами бозгар аз ҳеҷ касе ёд накард
غلطم باز گر از هیچ کسی یاد نکرد
Он чаҳ ман дар ғамат эй хусрав хубон кардам
آن چه من در غمت ای خسرو خوبان کردم
Ба шикархандаи ширини ту Фарҳод накард
به شکرخندهٔ شیرین تو فرهاد نکرد
Новаки нози ту нозам ки ба як чашм задӣ
ناوک ناز تو نازم که به یک چشم زدی
Захм ҳо кард ба дил , ханҷар ҷаллод накард
زخم ها کرد به دل، خنجر جلاد نکرد
То киро талъату болои ту яғмо ки насохт
تا که را طلعت و بالای تو یغما که نساخت
Роҳи гулзор назд ғорат шамшод накард
راه گلزار نزد غارت شمشاد نکرد
Пои банди ғам ту кист дар офоқ ки нест
پای بند غم تو کیست در آفاق که نیست
Сарвро ҳасрати болои ту озод накард
سرو را حسرت بالای تو آزاد نکرد
Доғам аз гиря ки шуд боиси расвои ман
داغم از گریه که شد باعث رسوایی من
Кист каз дасти ҷигари гӯша ӣ худ дод накард
کیست کز دست جگر گوشه ی خود داد نکرد
Ту шукри хандаи чунонӣ ки ба ҳар ҷои гузарӣ
تو شکر خنده چنانی که به هر جا گذری
Нест ҷое ки даҳонати шукр обод накард
نیست جایی که دهانت شکر آباد نکرد
Сӯхт аз оҳ « вафое » ҷигари санг , вале :
سوخت از آه «وفایی» جگر سنگ، ولی:
Асарӣ дар дили он тарки парӣ зод накард !
اثری در دل آن ترک پری زاد نکرد!