Ёри армании мазҳаб ! шӯхи исавии миллат

یارِ ارمنی‌مذهب! شوخِ عیسَوی‌ملّت

ё биёи мусулмони шӯ , ё маро нсоро кун

یا بیا مسلمان شو، یا مرا نَصارا کن

ё ба теғи абрӯяти хӯн бе гуноҳами рез

یا به تیغِ ابرویت خونِ بی‌گناهم ریز

ё аз ин ду лимуяти чораи дил мо кун

یا از این دو لیمویت چارهٔ دلِ ما کن

Бар фикан зи рухи парда дар шикани хами кокул

بر فکن ز رخ پرده در شکن خمِ کاکل

Зоҳиди сўомъро роҳиб килисо кун

زاهدِ صَوامِع را راهِبِ کلیسا کن

Соқио ! сарати гирдам илтифот кун ҷомӣ !

ساقیا! سرت گردم التفات کن جامی!

Оташи дарунамро як замон мудово кун

آتشِ درونم را یک زمان مداوا کن

То ба кӣ « вафое »ро хӯн бе гунаҳи резӣ

تا به کی «وفایی» را خونِ بی‌گنه ریزی

Гар худо наме донеи шармӣ аз масеҳо кун !

گر خدا نمی‌دانی شرمی از مسیحا کن!