Шуд машки шаб чу анбари ашҳб
شد مشک شب چو عنبر اشهب
Шуд дар шабаҳи ақиқи мураккаб
شد در شبه عقیق مرکب
Зон бим коФтоб занад теғ
زان بیم کافتاب زند تیغ
Ларзон шудаи зи гардуни кавкаб
لرزان شده ز گردون کوکب
Моро ба субҳи мужда ҳаме дод
ما را به صبح مژده همی داد
Он рости гӯи хурӯси муҷарраб
آن راست گو خروس مجرب
намезад ду боли худро бар ҳам
می زد دو بال خود را بر هم
Аз чист он надонам ёрб
از چیست آن ندانم یارب
Ҳаст аз нишот омадани рӯз
هست از نشاط آمدن روز
ё аз таъассуф шудани шаб
یا از تأسف شدن شب
эй моҳ рӯй силсилаи зулфин
ای ماه روی سلسله زلفین
Ваии нӯши лаби симини ғабғаб
وی نوش لب سیمین غبغب
Пеши ман ори бода аз он рӯй
پیش من آر باده از آن روی
Назд ман ори бӯса аз он лаб
نزد من آر بوسه از آن لب
Дилро накард бояд мағрур
دل را نکرد باید مغرور
Танро надошт бояд мтъб
تن را نداشت باید متعب
Дар давлату саодати соҳиб
در دولت و سعادت صاحب
Кодоб азу шудаст муҳаззаб
کاداب ازو شدست مهذب
Мнсўрбни Саиди бен Аҳмад
منصوربن سعید بن احمد
Каш бандаанд ҳурони ағлаб
کش بنده اند حران اغلب
Онкў амид рафт зи хона
آنکو عمید رفت ز خانه
Вонкў адиб рафт ба мактаб
وانکو ادیب رفت به مکتب
Дар фазл беназир ва на мағрур
در فضل بی نظیر و نه مغرور
Дар асл беқарин ва на мъҷб
در اصل بی قرین و نه معجب
Аз халқ ӯст чашмаи хуршед
از خلق اوست چشمه خورشید
Ваз халқ ӯст анбари ашҳб
وز خلق اوست عنبر اشهب
Наздики кирдигори макрам
نزدیک کردگار مکرم
Дар пеши шаҳриёри муқарраб
در پیش شهریار مقرب
Дар ҳар замон ба дониши мамдуҳ
در هر زمان به دانش ممدوح
Дар ҳар дилӣ ба ҷӯади мҳбб
در هر دلی به جود محبب
эй дар усӯли фазли мақдам
ای در اصول فضل مقدم
Вай дар фунуни илми мдрб
وی در فنون علم مدرب
Тақсир агар фитод ба хизмат
تقصیر اگر فتاد به خدمت
Ман бандаро мадори мъотб
من بنده را مدار معاتب
Комади ҳамеи роҳиро як чанд
کامد همی راهی را یک چند
Давр аз ҷамоли маҷлиси тўтб
دور از جمال مجلس توتب
То бар замин бирӯяд насрин
تا بر زمین بروید نسرین
То бар фалак барояд ақраб
تا بر فلک برآید عقرب
Ҷоҳи ту боди маймуни толеъ
جاه تو باد میمون طالع
Ҷони ту боди олии мрқб
جان تو باد عالی مرقب
Дар маҷлисати зи ртбти мФрш
در مجلست ز رتبت مفرش
Бар охурати зи давлати мураккаб
بر آخورت ز دولت مرکب