Гуҳи видоъи бути ман маро канор гирифт
گه وداع بت من مرا کنار گرفت
Бидон канори дилами соъатӣ қарор гирифт
بدان کنار دلم ساعتی قرار گرفت
Висоли он бути сӯрат ҳаме набаст маро
وصال آن بت صورت همی نبست مرا
Бидон замон ки марои танг дар канор гирифт
بدان زمان که مرا تنگ در کنار گرفت
Чу васл ӯро ақли ман устувор надошт
چو وصل او را عقل من استوار نداشت
Ду дасти ман сари злФинш устувор гирифт
دو دست من سر زلفینش استوار گرفت
Ба рӯйиши андари чандон нигоҳ кардам тез
به رویش اندر چندان نگاه کردم تیز
Ки дидаам ҳамаи дидори он нигор гирифт
که دیده ام همه دیدار آن نگار گرفت
Дар ин дил аз ғам ӯ оташӣ фурухт фироқ
در این دل از غم او آتشی فروخت فراق
Ки мағзи ман зтФи он ҳама шарор гирифт
که مغز من زتف آن همه شرار گرفت
зи бас ки дида ш борида қатраи борон
ز بس که دیده ش باریده قطره باران
Канори ман ҳамаи лўлўӣ шоҳвор гирифт
کنار من همه لولوی شاهوار گرفت
зи бас ки гуфт ки ин дам чу дар шумор набӯд
ز بس که گفت که این دم چو در شمار نبود
Ки рӯзи ҳиҷри маро чанд раҳ шумор гирифт
که روز هجر مرا چند ره شمار گرفت
На дайр буд ки бархест он сутӯдаи хисол
نه دیر بود که برخاست آن ستوده خصال
Ба рафту ноқаи ҷмозаҳро маҳор гирифт
به رفت و ناقه جمازه را مهار گرفت
Бирав нишаст ва биҷуст ӯ зи ҷои хуш чу дев
برو نشست و بجست او ز جای خوش چو دیو
Ба қасди ғазнӣни ҳанҷор раҳгузор гирифт
به قصد غزنین هنجار رهگذار گرفت
Қатор буд дамодами гирифтаи роҳ ба пеш
قطار بود دمادم گرفته راه به پیش
Куланги вор ба раҳ бар дам қатор гирифт
کلنگ وار به ره بر دم قطار گرفت
Дарин миёна буғурред кӯси шоҳаншаҳ
درین میانه بغرید کوس شاهنشه
зи бонг ӯ ҳама рӯй замин ҳўор гирифт
ز بانگ او همه روی زمین هوار گرفت
Нишастам аз бар он барқи сайри раъди овоз
نشستم از بر آن برق سیر رعد آواز
Басони боди раҳи водӣ ва қФор гирифт
بسان باد ره وادی و قفار گرفت
Гуҳӣ чу моҳии андари миён Ҷайҳун рафт
گهی چو ماهی اندر میان جیحون رفت
Гуҳӣ чу ранги ҳамеи теғ кӯҳсор гирифт
گهی چو رنگ همی تیغ کوهسار گرفت
Гуҳӣ чу шери ҳаме дар миёни бешаи бхост
گهی چو شیر همی در میان بیشه بخاست
Гуҳӣ чу танин ҳанҷори жарф ғор гирифт
گهی چو تنین هنجار ژرف غار گرفت
Чу шаби з рӯй ҳаво дар навишт чодари зард
چو شب ز روی هوا در نوشت چادر زرد
Фалаки заминро андари сияҳ азор гирифт
فلک زمین را اندر سیه ازار گرفت
Чу гӯии зарди зи пирӯзаи гунбадии хуршед
چو گوی زرد ز پیروزه گنبدی خورشید
зи бими чархи сӯии мағриб алҳзор гирифт
ز بیم چرخ سوی مغرب الحذار گرفت
зи чапу рост ҳаме рафт тирўори шаҳоб
ز چپ و راست همی رفت تیروار شهاب
зи бим ӯ ҳамаи пеш ва пас ҳисор гирифт
ز بیم او همه پیش و پس حصار گرفت
зи бас ки хӯрдам дар шаби шароби пиндорӣ
ز بس که خوردم در شب شراب پنداری
зи хоби рӯзи ду чашмами ҳаме хумор гирифт
ز خواب روز دو چشمم همی خمار گرفت
Падед шуд зи фалаки меҳр чун сбикаҳи зар
پدید شد ز فلک مهر چون سبیکه زر
Ки ҳеҷ таҷрибаи натавонади он айёр гирифт
که هیچ تجربه نتواند آن عیار گرفت
Шуъоъи хуршед аз калла кабӯд битофт
شعاع خورشید از کله کبود بتافت
Чу нур рӯйнигор ман интишор гирифт
چو نور روی نگار من انتشار گرفت