Қавла : қол ё أиҳои алмлؤои أикми иأтинии бършҳо ? мақотил гуфт чун расӯли билқис аз наздики сулаймони бозгашт ва он аҷоибу бадоеъ ки дар мамлакати сулаймони дида буд боз гуфт ва ҳикоят кард , билқис гуфт : ҳозои амри ман алсмоء , ин корӣ осмонӣаст , сохтау хоста раббонӣаст ва моро ковидан бо вай рӯй нест ва дар мухолифату мнобзти ваии ҳеҷ касро тоқат нест ва он малики вай на малики срсрист ки он ҷузи набуввату таъӣд илоҳӣ нест . Кас фиристод ба сулаймон ки : инак ман омадам бо сарону сарварони қавми хеш то дар кор ту бингараму дайн ту бидонам ки чисту марои бача май хуоне ? он гуҳи арши хешро дар охири ҳафт андарун устувор биниҳоду посбонон бар он муваккил кард ва дар мамлакати хеш ноӣбӣ багумошт ки кор малик меронад ва он сарири малик нигаҳ медорад то кас дар он тамаъ накунад ва он гуҳи азм раҳил кард бо дувоздаҳ ҳазор сарҳанг аз меҳтарони қавми хеш бо ҳар сарҳангии ададии фаровон аз хайлу ҳашам . Ва сулаймон ки онҷо буд донист ки билқис меояду бқсди ислом ва имон меояд ки Ҷабраил аз пеши омада буд ва ӯро хабар додау лиҳозои қоли сулаймон : қабл أни иأтўнии мусалламин , эй муъминин муваҳҳидин .
قوله: قالَ یا أَیُّهَا الْمَلَؤُا أَیُّکُمْ یَأْتِینِی بِعَرْشِها؟ مقاتل گفت چون رسول بلقیس از نزدیک سلیمان بازگشت و آن عجایب و بدایع که در مملکت سلیمان دیده بود باز گفت و حکایت کرد، بلقیس گفت: هذا امر من السّماء، این کاری آسمانی است، ساخته و خواسته ربّانی است و ما را کاویدن با وی روی نیست و در مخالفت و منابذت وی هیچ کس را طاقت نیست و آن ملک وی نه ملک سرسریست که آن جز نبوّت و تأیید الهی نیست. کس فرستاد به سلیمان که: اینک من آمدم با سران و سروران قوم خویش تا در کار تو بنگرم و دین تو بدانم که چیست و مرا بچه میخوانی؟ آن گه عرش خویش را در آخر هفت اندرون استوار بنهاد و پاسبانان بر آن موکّل کرد و در مملکت خویش نائبی بگماشت که کار ملک میراند و آن سریر ملک نگه میدارد تا کس در آن طمع نکند و آن گه عزم رحیل کرد با دوازده هزار سرهنگ از مهتران قوم خویش با هر سرهنگی عددی فراوان از خیل و حشم. و سلیمان که آنجا بود دانست که بلقیس میآید و بقصد اسلام و ایمان میآید که جبرئیل از پیش آمده بود و او را خبر داده و لهذا قال سلیمان: قَبْلَ أَنْ یَأْتُونِی مُسْلِمِینَ، ای مؤمنین موحّدین.
Ва гуфтаанд миёни билқису сулаймони даҳ рӯзи роҳ буд , ва гуфтаанд ду моҳаи роҳ буд . Рӯзии сулаймони беруни рафта буд аз анҷо ки буд ғуборӣ азим дид бмсоФти як фарсангу сулаймони мардии маҳиб буд , каси бобтдоءи сухан бо вай нёрстӣ гуфт то нахусти вай ибтидо кардӣ чун он ғубор дид аз давр гуфт : мо ҳозо ? он чаҳ ғубораст ? гуфтанд , билқисаст ки меояд . Гуфт :у қади нзлти мнои бҳзои алмкон ,у билқиси чунин бмо наздик расед . Он гуҳи сулаймон рӯй бо лашкар хеш кард гуфт : ё أиҳои алмлؤои أикми иأтинӣ бършҳо кист аз шумо ки арши билқиси он соъати бмни орад , ва ин сухани ду маъниро гуфт : яке он ки караи сулаймони ани истҳли ҳаримҳо баъди исломҳо , раво надошт ки баъд аз омадани билқису исломи ваии даст дар ҳарими ваии барад ки баъд аз исломи он вайро ҳалол набӯд , дигари маънӣ : аҳби ани ириҳои муъҷизаи тдлҳои баҳои алии саҳаи нбўаҳи сулаймон , хост ки он ҳоли сулаймонро мъҷзтӣ буду далелӣ бар сидқи набуввати вай то билқиси бидонад ки овардан он сарир аз чунон ҷои устувори муҳками бики лаҳзаи ҷузи қудрати илоҳӣу мӯъҷизат набавӣ нест .
و گفتهاند میان بلقیس و سلیمان ده روز راه بود، و گفتهاند دو ماهه راه بود. روزی سلیمان بیرون رفته بود از انجا که بود غباری عظیم دید بمسافت یک فرسنگ و سلیمان مردی مهیب بود، کس بابتداء سخن با وی نیارستی گفت تا نخست وی ابتدا کردی چون آن غبار دید از دور گفت: ما هذا؟ آن چه غبارست؟ گفتند، بلقیس است که می آید. گفت: و قد نزلت منّا بهذا المکان، و بلقیس چنین بما نزدیک رسید. آن گه سلیمان روی با لشکر خویش کرد گفت: یا أَیُّهَا الْمَلَؤُا أَیُّکُمْ یَأْتِینِی بِعَرْشِها کیست از شما که عرش بلقیس آن ساعت بمن آرد، و این سخن دو معنی را گفت: یکی آن که کره سلیمان ان یستحلّ حریمها بعد اسلامها، روا نداشت که بعد از آمدن بلقیس و اسلام وی دست در حریم وی برد که بعد از اسلام آن وی را حلال نبود ، دیگر معنی: احبّ ان یریها معجزة تدلّها بها علی صحة نبوة سلیمان، خواست که آن حال سلیمان را معجزتی بود و دلیلی بر صدق نبوت وی تا بلقیس بداند که آوردن آن سریر از چنان جای استوار محکم بیک لحظه جز قدرت الهی و معجزت نبوی نیست.
Қоли ъФрити ман алҷни тқўл : ъФриту ъФриаҳу ъФру ъФориаҳ ,у алъараби татаббуъи кули воҳидаи минҳои бтобъаҳи тқўл : ъФрит , нафарят , ъФриаҳ ,у ъФри нафарӣа , ъФр , ъФориаҳи нФориаҳ .
قالَ عِفْرِیتٌ مِنَ الْجِنِّ تقول: عفریت و عفریّة و عفر و عفاریة، و العرب تتبع کل واحدة منها بتابعة تقول: عفریت، نفریت، عفریّة، و عفر نفریّة، عفر، عفاریة نفاریة.
Ва алъФрит ъанд алъараби алморд , алдоҳиаҳ , иқол : ҳўи схри Сайиди алҷн ,у кон қабл злки мтмрдои алии сулаймон ,у истахри Форси тнсби илайҳ . Он ъФрит гуфт : Сайиди алҷн ки он тахти бтўи орми пеш аз он ки аз маҷлиси ҳукм ва қазо бархезӣу одати сулаймони чунон буд ки то ба нимаи рӯзи маҷлиси ҳукму фасл қазо бинишастед , ва гуфтаанд мақоми ваии он буд ки ҳар рӯзи бмҷлси ваъз ва тзкир бинишастед то офтоб боло гирифтӣу إнии алайҳи лқўии أмин эй қавии алии ҳамлаи амини алии ҷавоҳира ,у қили амини Фимои ақўл . Сулаймон гуфт : зӯдтар аз ин хоҳам .
و العفریت عند العرب المارد، الداهیة ، یقال: هو صخر سیّد الجنّ، و کان قبل ذلک متمردا علی سلیمان، و اصطخر فارس تنسب الیه. آن عفریت گفت: سید الجن که آن تخت بتو آرم پیش از آن که از مجلس حکم و قضا برخیزی و عادت سلیمان چنان بود که تا به نیمه روز مجلس حکم و فصل قضا بنشستید، و گفتهاند مقام وی آن بود که هر روز بمجلس وعظ و تذکیر بنشستید تا آفتاب بالا گرفتی وَ إِنِّی عَلَیْهِ لَقَوِیٌّ أَمِینٌ ای قوی علی حمله امین علی جواهره، و قیل امین فیما اقول. سلیمان گفت: زودتر از این خواهم.
Қоли алзии ъндаҳи илми ман алкитоб , ақволи муфассирон мухталифаст ки алзии ъндаҳи илми ман алкитоб ки буд ? қавмӣ гуфтанд Ҷабраил буд ( ъ ) , қавмӣ гуфтанд Фриштаҳи дигар буд , раби алъзаҳ ӯро қарин сулаймон карда буд пайваста бо вай будӣ ва ӯро қӯт додӣ , қавмӣ гуфтанд Хизр буд ( ъ ) , қавмӣ гуфтанд мардӣ буд аз ҳмири ном ӯ збаҳу мустаҷоби алдъўаҳ буду қили исмаи млихо ,у қили исмаи астўс ,у қили ҳўи сулаймон ( ъ )у злки ани рҷлои ъолмои ман банӣ Исроил , отоаҳи аллоҳи уламоу фуқаҳо , қоли أнои отик ба қабл أни иртди إлики трФк , Фқоли сулаймон : ҳот . Фқол : анат алнабӣ бен алнабӣу лӣси аҳдкм авҷа ъанд аллоҳи мнку лои ақдри алии ҳоҷатаи ?фони даъвати аллоҳу талабати илайҳи кони ъндк . Қоли сидқат , ФФъли злк , Фҷии ءи болърши фии алўқт . Ва қавли муътамаду бештарин муфассирон онаст ки осиф буд вазири сулаймону дабири вай . Ва ҳўи осифи бен брхёи бен шмъўни раҷули солеҳи муҷоби алдъоء , қоли ибни аббоси ани осифи қоли лслимони ҳайни слӣу дуои аллоҳи ъзу ҷл : мади ъиник ҳатто интҳии трФк . Қоли Фмди сулаймони Айнӣаи Фнзри наҳви алимну дуои осиф , Фбъси аллоҳи субҳонаи алмлоӣкаҳи Фҳмлўои алсрири ман таҳти аларзи ихдўни аларзи худо ҳатто анхрқти аларзи болсрири байни ядии сулаймон ( ъ ) .
قالَ الَّذِی عِنْدَهُ عِلْمٌ مِنَ الْکِتابِ، اقوال مفسران مختلف است که الَّذِی عِنْدَهُ عِلْمٌ مِنَ الْکِتابِ که بود؟ قومی گفتند جبرئیل بود (ع)، قومی گفتند فریشته دیگر بود، ربّ العزة او را قرین سلیمان کرده بود پیوسته با وی بودی و او را قوّت دادی، قومی گفتند خضر بود (ع)، قومی گفتند مردی بود از حمیر نام او ضبه و مستجاب الدعوة بود و قیل اسمه ملیخا، و قیل اسمه اسطوس، و قیل هو سلیمان (ع) و ذلک انّ رجلا عالما من بنی اسرائیل، آتاه اللَّه علما و فقها، قال أَنَا آتِیکَ بِهِ قَبْلَ أَنْ یَرْتَدَّ إِلَیْکَ طَرْفُکَ، فقال سلیمان: هات. فقال: انت النبی بن النبی و لیس احدکم اوجه عند اللَّه منک و لا اقدر علی حاجته فان دعوت اللَّه و طلبت الیه کان عندک. قال صدقت، ففعل ذلک، فجیء بالعرش فی الوقت. و قول معتمد و بیشترین مفسران آنست که آصف بود وزیر سلیمان و دبیر وی. و هو آصف بن برخیا بن شمعون رجل صالح مجاب الدعاء، قال ابن عباس انّ آصف قال لسلیمان حین صلّی و دعا اللَّه عزّ و جلّ: مدّ عینیک حتی ینتهی طرفک. قال فمدّ سلیمان عینیه فنظر نحو الیمن و دعا آصف، فبعث اللَّه سبحانه الملائکة فحملوا السریر من تحت الارض یخدون الارض خدّا حتی انخرقت الارض بالسّریر بین یدی سلیمان (ع).
Аммо ончӣ гуфт : ъндаҳи илми ман алкитоби ин илми китоби исми аллоҳ алаъзамаст : ё ҳӣ ё қиўм ё зои алҷлолу алокром ,у бқўли баъзе : ё алҳноу илоҳи алхлқи аҷмъини ?илҳо воҳдои лои илоҳи алои анат , аитнии бършҳо . Ва қили қоли осифи болъбриаҳ : оҳёи шроҳё ,у ҳўи алосми алаъзам ,у қоли алҳсни исми аллоҳи алаъзам : ё аллоҳ ё раҳмон .
امّا آنچه گفت: عِنْدَهُ عِلْمٌ مِنَ الْکِتابِ این علم کتاب اسم اللَّه الاعظم است: یا حیّ یا قیوم یا ذا الجلال و الاکرام، و بقول بعضی: یا الهنا و اله الخلق اجمعین الها واحدا لا اله الّا انت، ایتنی بعرشها. و قیل قال آصف بالعبریة: آهیا شراهیا، و هو الاسم الاعظم، و قال الحسن اسم اللَّه الاعظم: یا اللَّه یا رحمان.
Қабл أни иртди إлики трФки иртидоди алтрФи ани ирҷъи илои алнозри ман рؤиаҳи шайъи ءи кони инзри илайҳ .
قَبْلَ أَنْ یَرْتَدَّ إِلَیْکَ طَرْفُکَ ارتداد الطرف ان یرجع الی الناظر من رؤیة شیء کان ینظر الیه.
Флмои роаҳи иҷўзи ани икўни ҳозои алрои сулаймону иҷўзи ани икўни осифи Флмои роаҳи мстқрои ъндаҳи росхои фии аларзи собтои фӣҳо конаи фӣаи байт ӯ банӣ ртқоу ҳўи мҳмўли илайҳи ман морби илои алшоми фии миқдори иртидоди алтрФ . Қоли ҳозои ман фазли рабии аътонии бФзлаҳу анмои аътонии лимтҳннии Фистхрҷи манӣ мо аўдъаҳи фии ман маълумаи أ ашкр наамма алии ҳайни аътонии мо ардтам акФри злки Флои ашкраҳи алайҳ , ва ман шукри аллоҳ алӣ наамма , Фонмои ишкри лнФсаҳи лони нафъи злки иъўди илайҳи ҳайси истўҷби алмзид ва ман куфри ?фони музираи куфраи алайҳи лои алии рабау аллоҳи субҳонаи мутаъоли алии алмзору алманофеъи ғании ани ибодау аФъолҳм .
فَلَمَّا رَآهُ یجوز ان یکون هذا الرّای سلیمان و یجوز ان یکون آصف فَلَمَّا رَآهُ مُسْتَقِرًّا عِنْدَهُ راسخا فی الارض ثابتا فیها کانّه فیه بیت او بنی رتقا و هو محمول الیه من مآرب الی الشام فی مقدار ارتداد الطرف. قالَ هذا مِنْ فَضْلِ رَبِّی اعطانی بفضله و انّما اعطانی لیمتحننی فیستخرج منی ما اودعه فی من معلومه أ اشکر نعمه علی حین اعطانی ما اردت ام اکفر ذلک فلا اشکره علیه، و من شکر اللَّه علی نعمه، فانّما یشکر لنفسه لانّ نفع ذلک یعود الیه حیث یستوجب المزید و من کفر فان مضرّة کفره علیه لا علی ربّه و اللَّه سبحانه متعال علی المضارّ و المنافع غنیّ عن عباده و افعالهم.
Ва қили маънии алоиаҳ : ҳозои ман фазли рабии алии ази сири фии умматии ман иҷрии алии яда мисли ҳозои аламр , ФФзли злки лӣу ҳўи анъоми алӣ . Ва қили ани сулаймони тадохулаи шайъи ءи ази сори ғайраи ман уммата аълам манеҳу ақдри алии баъзи аломўри Фқоли риёзаи лнФсаҳ : ҳозои ман фазли рабӣ эй ммои имлкаҳи иҷълаҳи лмни ишоءи ман ибодаи Фқди ҷаъли ҳозои алФзли лиҳозои алзии аўтии уламои ман алкитоби либлўнии ашкри أми акФр .
و قیل معنی الایة: هذا من فضل ربّی علیّ اذ صیّر فی امّتی من یجری علی یده مثل هذا الامر، ففضل ذلک لی و هو انعام علیّ. و قیل انّ سلیمان تداخله شیء اذ صار غیره من امته اعلم منه و اقدر علی بعض الامور فقال ریاضة لنفسه: هذا مِنْ فَضْلِ رَبِّی ای ممّا یملکه یجعله لمن یشاء من عباده فقد جعل هذا الفضل لهذا الذی اوتی علما من الکتاب لیبلونی اشکر أم اکفر.
Қавла : қоли нкрўои лҳои аршҳо , алтнкири алтғиири илои ҳоли инкрҳои соҳибҳо азои роҳо ,у алмънии азҳрўаҳи лҳои лтнкри мавзеаи ъндии Фннзри أи тҳтдии бони тааллуми ани ҳозои лои иқдри алайҳи алои аллоҳ Фтؤмнам лои ттнбаҳи лзлк . Ва қоли вҳбу Муҳамади бен каъбу ғайриҳумои ман аҳли алкитоб : хоФти алҷни ани итзўҷҳои сулаймони ФтФшии илайҳи асрори алҷни Флои инФкўни ман тасхири сулаймону зритаҳи ман баъдаи Фородўои ани изҳдўаҳи фӣҳо Фосоؤои алсноءи алайҳо .
قوله: قالَ نَکِّرُوا لَها عَرْشَها، التنکیر التغییر الی حال ینکرها صاحبها اذا رآها، و المعنی اظهروه لها لتنکّر موضعه عندی فننظر أ تهتدی بان تعلم انّ هذا لا یقدر علیه الّا اللَّه فتؤمن ام لا تتنبّه لذلک. و قال وهب و محمد بن کعب و غیرهما من اهل الکتاب: خافت الجنّ ان یتزوّجها سلیمان فتفشی الیه اسرار الجنّ فلا ینفکّون من تسخیر سلیمان و ذریته من بعده فارادوا ان یزهدوه فیها فاساؤا الثناء علیها.
Ва қолўои ани фии ақлҳо хблоу ани раҷулҳо кҳоФри алҳмори Фороди сулаймони ани ихтбри ақлҳо Фқол : нкрўои лҳои аршҳо эй ғайривои лҳои аршҳо бтғиири сӯратаи Фоҷълўои аълоаи асфалау муқаддамаи мؤхраҳ . Ва қили назъи мо кони алайҳи ман Фсўсаҳу ҷавоҳира . Ва қили зайди фӣа ва нақс наназар أи тҳтдии илои муъаррифаи аршҳо ФнърФи бзлки ақлҳо أми ткўни ман аллазӣнаи лои иҳтдўни илайҳ .
و قالوا انّ فی عقلها خبلا و انّ رجلها کحافر الحمار فاراد سلیمان ان یختبر عقلها فقال: نَکِّرُوا لَها عَرْشَها ای غیّروا لها عرشها بتغییر صورته فاجعلوا اعلاه اسفله و مقدّمه مؤخّره. و قیل نزع ما کان علیه من فصوصه و جواهره. و قیل زید فیه و نقص نَنْظُرْ أَ تَهْتَدِی الی معرفة عرشها فنعرف بذلک عقلها أَمْ تَکُونُ مِنَ الَّذِینَ لا یَهْتَدُونَ الیه.
Флмои ҷоءти билқиси қили лҳои أ ҳоказо ършки қолати кأнаҳи ҳўи шбҳтаҳ ба Флми тқри бзлку лами тнкр , феълами сулаймони камоли ақлҳо , қоли алҳусайн бен фазл : шбҳўои алайҳои бқўлҳм : أ ҳоказо ършки Фшбҳти алайҳими бқўлҳо : кأнаҳи ҳў , Фоҷобтҳми алии ҳасби сؤолҳм ,у луи қолўои лҳои ҳозои ършки лқолти нъм .
فَلَمَّا جاءَتْ بلقیس قِیلَ لها أَ هکَذا عَرْشُکِ قالَتْ کَأَنَّهُ هُوَ شبّهته به فلم تقرّ بذلک و لم تنکر، فعلم سلیمان کمال عقلها، قال الحسین بن فضل: شبّهوا علیها بقولهم: أَ هکَذا عَرْشُکِ فشبّهت علیهم بقولها: کَأَنَّهُ هُوَ، فاجابتهم علی حسب سؤالهم، و لو قالوا لها هذا عرشک لقالت نعم.
Қавла :у أўтинои алълми ман қаблҳо . . . Қоли алмФсрўн : ҳозои ман қавли сулаймони иқўли аътинои илми алтўҳиду алнбўаҳи ман қабл тавҳидҳоу кнои мусалламин , қабл исломҳо кأнаҳи ибориҳои бқдми дайнау исломаи ази бортаҳи бмлкҳо ,у қили ҳозои ман қавли билқиси лмои рأти аршҳо анҳу сулаймони қолат : урфати ҳзаҳу аўтинои алълми бсҳаҳи нбўтки болоёти алмтқдмаҳи ман амри алҳдҳду алрсли ман қабл ҳзаҳи алмъҷзаҳи алтии рأитҳои ман эҳзори алършу кнои мусалламин мнқодин , мутӣъин ломрки ман қабл ани ҷӣнок .
قوله: وَ أُوتِینَا الْعِلْمَ مِنْ قَبْلِها... قال المفسرون: هذا من قول سلیمان یقول اعطینا علم التوحید و النبوة من قبل توحیدها وَ کُنَّا مُسْلِمِینَ، قبل اسلامها کأنّه یباریها بقدم دینه و اسلامه اذ بارته بملکها، و قیل هذا من قول بلقیس لمّا رأت عرشها عنه سلیمان قالت: عرفت هذه و اوتینا العلم بصحة نبوّتک بالآیات المتقدّمة من امر الهدهد و الرسل من قبل هذه المعجزة التی رأیتها من احضار العرش وَ کُنَّا مُسْلِمِینَ منقادین، مطیعین لامرک من قبل ان جئناک.
Ва садҳо мо канти тааббуди ман дуни аллоҳи иҷўзи ани икўни мо фии мавзеи алрФъи Фикўни фоил ва садҳо эй садҳо ибодаи алшмси ман ибодаи аллоҳ ,у фӣаи даллолаи ани иштиғоли алмрءи болшии ءи исдаҳи ани феъли зиддиҳ . Ва канти алмрأаҳи тааббуди алшмси Фконти ибодатҳо Аёҳо тсди ани ибодаи аллоҳу иҷўзи ани икўни мо фии мавзеи алнсб ,у алмънии садҳо сулаймони ани ибодаи алшмси Флмои сиқти алҷори насб .
وَ صَدَّها ما کانَتْ تَعْبُدُ مِنْ دُونِ اللَّهِ یجوز ان یکون ما فی موضع الرفع فیکون فاعل وَ صَدَّها ای صدّها عبادة الشمس من عبادة اللَّه، و فیه دلالة انّ اشتغال المرء بالشیء یصدّه عن فعل ضدّه. و کانت المرأة تعبد الشمس فکانت عبادتها ایّاها تصدّ عن عبادة اللَّه و یجوز ان یکون ما فی موضع النصب، و المعنی صدّها سلیمان عن عبادة الشمس فلمّا سقط الجار نصب.
ли лҳои адхлии алсрҳи алсрҳи алқср ва манеҳ қавла : ёҳомон ибни лии срҳо эй қсро ,у қили алсрҳи арсаи ?илдору кули бноءи ъоли ман схр ӯ зҷоҷи Фҳўи срҳ , ва « аллҷаҳ » алзҳзоҳи ман алмоء , ва « алммрд » алммлсу саммии аламради лонаи амлси алхдин ,у шаҷараи мрдоءи лӣси алайҳоу рқ ,у арзи мрдоءи лӣси фӣҳо набот . Муфассирон гуфтанд чун билқиси азм рафтан кард ба наздики сулаймони ҷин бо якдигар гуфтанд ки аллоҳи таъолии ҷину инсу туюру вуҳушу боди мусаххар сулаймон карда ва ин билқис малака сабост агар сулаймон ӯро бизанӣ кунад ва аз вай ғуломӣ зояд мо ҳаргиз аз тасхиру убудийяти нрҳим .
لَ لَهَا ادْخُلِی الصَّرْحَ الصرح القصر و منه قوله: یا هامانُ ابْنِ لِی صَرْحاً ای قصرا، و قیل الصّرح عرصة الدّار و کل بناء عال من صخر او زجاج فهو صرح، و «اللجة» الضحضاح من الماء، و «الممرد» المملّس و سمّی الامرد لانّه املس الخدّین، و شجرة مرداء لیس علیها و رق، و ارض مرداء لیس فیها نبات. مفسّران گفتند چون بلقیس عزم رفتن کرد به نزدیک سلیمان جن با یکدیگر گفتند که اللَّه تعالی جن و انس و طیور و وحوش و باد مسخّر سلیمان کرده و این بلقیس ملکه سباست اگر سلیمان او را بزنی کند و از وی غلامی زاید ما هرگز از تسخیر و عبودیّت نرهیم.
Тадбир онаст ки билқисро бичишам сулаймон зишт кунем то ӯро бизанӣ накунад . Омаданду сулаймонро гуфтанд : раҷулҳо раҷули ҳмор ва анҳо шъроءи алсоқини лони амҳо канти ман алҷни Флълҳои назъати илои амҳо . Чун эшон чунон гуфтанд сулаймони хост ки ҳақиқати он бидонаду қадаму соқ вай бибинад . Шаётинро фармуд то кӯшкӣ сохтанд аз обгина , гӯйии он кӯшки об буд аз равшаноӣу сипедӣ . Ва он гуҳ бифармуд то оби зери он кӯшки бронднду моҳӣу дўоби баҳрӣ дар ан об карду сарири худ болой он биниҳод , чунон ки раҳгузари билқис бар сари он обгина буд то бнздик сулаймон шавад . Он соъат ки билқис бар тарафи он қаср ва он арса расед офтоби варони тофта буду об софӣ менамӯду моҳёнро медид . ӯро гуфтанд : хулии алсрҳ
تدبیر آنست که بلقیس را بچشم سلیمان زشت کنیم تا او را بزنی نکند. آمدند و سلیمان را گفتند: رجلها رجل حمار و انّها شعراء السّاقین لانّ امّها کانت من الجن فلعلّها نزعت الی امّها. چون ایشان چنان گفتند سلیمان خواست که حقیقت آن بداند و قدم و ساق وی ببیند. شیاطین را فرمود تا کوشکی ساختند از آبگینه، گویی آن کوشک آب بود از روشنایی و سپیدی. و آن گه بفرمود تا آب زیر آن کوشک براندند و ماهی و دواب بحری در ان آب کرد و سریر خود بالای آن بنهاد، چنان که رهگذر بلقیس بر سر آن آبگینه بود تا بنزدیک سلیمان شود. آن ساعت که بلقیس بر طرف آن قصر و آن عرصه رسید آفتاب وران تافته بود و آب صافی مینمود و ماهیان را میدید. او را گفتند:ْخُلِی الصَّرْحَ
Дар ои дарин қаср . Билқиси пиндошт ки он ҳама обаст ва ӯро дар он об мехонд , бо худ гуфт : мо ваҷди ибни Довӯди ъзобои иқтлнӣ ба алои алғрқи писари Довӯди биҷузи ғарқи азобӣ дигар намедонист ки марои бикашад , доман аз соқ бар кашид то пой дар об наад . Сулаймони қадаму соқ вай бидид , Фозои ҳумои аҳсани соқи фии алднё ва қудамоҳо кқдми алонсон . Сулаймони он гуҳи чашм аз ваии бгрдониду боўоз баланд гуфт : на срҳи ммрди ман қўориру лӣси ббҳр .
در آی درین قصر. بلقیس پنداشت که آن همه آبست و او را در آن آب میخواند، با خود گفت: ما وجد ابن داود عذابا یقتلنی به الا الغرق پسر داود بجز غرق عذابی دیگر نمیدانست که مرا بکشد، دامن از ساق بر کشید تا پای در آب نهد. سلیمان قدم و ساق وی بدید، فاذا هما احسن ساق فی الدنیا و قدماها کقدم الانسان. سلیمان آن گه چشم از وی بگردانید و بآواز بلند گفت:نَّهُ صَرْحٌ مُمَرَّدٌ مِنْ قَوارِیرَ و لیس ببحر.
Аҳли тафсирро дарин қиссаи се қавласт : қавмӣ гуфтанд ҷин бар ваии дурӯғи бастанд аз бими он ки сулаймон ӯро бизанӣ кунаду ренеи қадами вай чун қадами одамиён буду соқи ваии некӯтарин соқҳо буд , қавмӣ гуфтанд сухани ҳамон буд ки ҷин гуфтанд ва бар соқи ваии мӯии фаровон буд аммо шаётини тадбири азолт он карданд бнўраҳ , ва аз он рӯзи бози истеъмоли нура дар ситурдани мӯии миёни одамиён падед омад , қавл сеюм онаст ки : лами икни лҳои ҳоФри ғайри ани мؤхртии қадамӣҳо контои кмؤхри алҳоФр .
اهل تفسیر را درین قصّه سه قول است: قومی گفتند جن بر وی دروغ بستند از بیم آن که سلیمان او را بزنی کند و رنه قدم وی چون قدم آدمیان بود و ساق وی نیکوترین ساقها بود، قومی گفتند سخن همان بود که جنّ گفتند و بر ساق وی موی فراوان بود امّا شیاطین تدبیر ازالت آن کردند بنوره، و از آن روز باز استعمال نوره در ستردن موی میان آدمیان پدید آمد، قول سوم آنست که: لم یکن لها حافر غیر انّ مؤخّرتی قدمیها کانتا کمؤخّر الحافر.
Пас сулаймон ӯро бад-ӣни ислом даъват кард ва мусулмон шуд ва гуфт : б إнии зулмати нафасии болкФри أслмти маъаи сулаймони ллаҳи раби Алъоламин . Ва анмои қолат ъ сулаймони лонҳои дахлати фии алислому лами търФи алшроӣъи баъди Фқлдтаҳу қолати динии дайна .
پس سلیمان او را بدین اسلام دعوت کرد و مسلمان شد و گفت:بِّ إِنِّی ظَلَمْتُ نَفْسِی بالکفر أَسْلَمْتُ مَعَ سُلَیْمانَ لِلَّهِ رَبِّ الْعالَمِینَ. و انّما قالتعَ سُلَیْمانَ لانّها دخلت فی الاسلام و لم تعرف الشرائع بعد فقلّدته و قالت دینی دینه.
Хилофаст миёни уламо ки сулаймон ӯро бизанӣ кард ё бадӣгарӣ дод бизанӣ : қавмӣ гуфтанд ӯро бизанӣ бмлк Ҳамадон дод номи ваии табаъ ва эшонро базмин Яман фиристоду малики Яман боишон таслим карду зўбъаҳи амири ҷин бо эшон бФрстод то аз баҳри эшон банноҳои азим ва қасрҳои олии сохт срўоҳу мрўоҳу ҳиндау ҳнидаҳу Флтўм , ин номи қалъаҳост дар замини Яман ки шаётини онро банно кардаанд аз баҳри табаъу имрӯз аз он ҳеҷ бар пой нест , ҳамаи хароб шуда ва нест гашта қавмӣ гуфтанд сулаймони билқисро бизанӣ кард ва ӯро дӯст дошт азим , ва ӯро писарии зоди номи ваии Довӯд ва он писар дар ҳаёти падар аз дунё бирафт . Ва сулаймони билқисро бо замин Яман фиристоду малики Яман бар вай муқарар кард , ва ҳар моҳии бзёрт вай шудӣ ва се рӯз ба наздики вай будӣ .
خلافست میان علما که سلیمان او را بزنی کرد یا بدیگری داد بزنی: قومی گفتند او را بزنی بملک همدان داد نام وی تبع و ایشان را بزمین یمن فرستاد و ملک یمن بایشان تسلیم کرد و زوبعه امیر جنّ با ایشان بفرستاد تا از بهر ایشان بناهای عظیم و قصرهای عالی ساخت صرواح و مرواح و هنده و هنیده و فلتوم، این نام قلعههاست در زمین یمن که شیاطین آن را بنا کردهاند از بهر تبع و امروز از آن هیچ بر پای نیست، همه خراب شده و نیست گشته قومی گفتند سلیمان بلقیس را بزنی کرد و او را دوست داشت عظیم، و او را پسری زاد نام وی داود و آن پسر در حیات پدر از دنیا برفت. و سلیمان بلقیس را با زمین یمن فرستاد و ملک یمن بر وی مقرّر کرد، و هر ماهی بزیارت وی شدی و سه روز به نزدیک وی بودی.
Ва сулаймони ҷинро фармуд то аз баҳри билқис дар замини Ямани қасрҳои олӣ сохтанду устувори қалъаҳои слҳину минўну ғмдон , имрӯзи он банноҳо ва қасрҳо ҳама харобанд ҷузи расму тлли он бар ҷой нест инаст ки раб Алъоламин мегуяд дар сӯраи ҳуд :у ҳсид .
و سلیمان جن را فرمود تا از بهر بلقیس در زمین یمن قصرهای عالی ساختند و استوار قلعههای سلحین و مینون و غمدان، امروز آن بناها و قصرها همه خرابند جز رسم و طلل آن بر جای نیست اینست که ربّ العالمین میگوید در سوره هود: وَ حَصِیدٌ.
Ва гуфтаанд малики сулаймони чиҳил сол буду умри ваии панҷоҳ ва панҷ солу билқиси баъд аз сулаймони бики моҳ аз дунё бирафту лмои ксрўои ҷидори тзмри вҷдўҳои қоима , алайҳои аснтону сбъўни ҳалаи қади амскҳои алсбру алмсткии зкрўои ман ҷамолҳо шиӣои ъзимои азои ҳаракати таҳаррукат , мактуби ъндҳо : анои билқиси соҳибаи сулаймони бен Довӯди хрби аллоҳи малики ман ихрби байтӣ . Ва кони злки фии малики Марвони алҳмор . Ва ахтлФўои фии исмҳо Фқили билқису қили тзмри бинти азинаҳи комаи ахтлФўои фии соҳибаи Юсуфи Фқили роъилу қили Зулайхо .
و گفتهاند ملک سلیمان چهل سال بود و عمر وی پنجاه و پنج سال و بلقیس بعد از سلیمان بیک ماه از دنیا برفت و لمّا کسروا جدار تذمر وجدوها قائمة، علیها اثنتان و سبعون حلّة قد امسکها الصبر و المصطکی ذکروا من جمالها شیئا عظیما اذا حرّکت تحرّکت، مکتوب عندها: انا بلقیس صاحبة سلیمان بن داود خرّب اللَّه ملک من یخرّب بیتی. و کان ذلک فی ملک مروان الحمار. و اختلفوا فی اسمها فقیل بلقیس و قیل تذمر بنت اذینة کما اختلفوا فی صاحبة یوسف فقیل راعیل و قیل زلیخا.
Ва лақади أрслнои إлии самуди أхоҳми солҳои самоаи ахоҳми лкўнаҳи фӣ алнсб манеҳам иърФўни маншаау муваллидаи أни аъбдўои аллоҳ эй бони аъбдўои аллоҳи вҳдаҳи Фإзои ҳам Фриқон эй лмои أтоҳми вҷдҳми алии ҳзаҳи улҳолау ҳаии анҳми аФтрқўои фурқатин : кофарау муъмина , ихтсмўн эй итқотлўн гуфтаанд ахтсом Фриқин онаст ки раб Алъоламин гуфт дар сӯраи алоъроФ ки дар миёни мустакбирон ва мустазъафон рафту злки қавлаи таъолӣ : қоли алмлأи аллазӣнаи асткбрўои ман қавмаи ллзини астзъФўо . . . Алоиаҳ . Ва гуфтаанд хусумати эшон дарин буд : кофарони сухани муъминон мстбъд медоштанд дар исботи набуввату рисолати солеҳ , мегуфтанд : аллоҳами ани кони мо иқўлўнаҳи ҳқои Фонзли ълинои алъзоб ,у злки фии қавлаи таъолӣ : аӣтнои бмои тъднои إни канти ман алмрслин .
وَ لَقَدْ أَرْسَلْنا إِلی ثَمُودَ أَخاهُمْ صالِحاً سمّاه اخاهم لکونه فی النسب منهم یعرفون منشأه و مولده أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ ای بان اعبدوا اللَّه وحده فَإِذا هُمْ فَرِیقانِ ای لمّا أتاهم وجدهم علی هذه الحالة و هی انّهم افترقوا فرقتین: کافرة و مومنة، یَخْتَصِمُونَ ای یتقاتلون گفتهاند اختصام فریقین آنست که ربّ العالمین گفت در سورة الاعراف که در میان مستکبران و مستضعفان رفت و ذلک قوله تعالی: قالَ الْمَلَأُ الَّذِینَ اسْتَکْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لِلَّذِینَ اسْتُضْعِفُوا... الایة. و گفتهاند خصومت ایشان درین بود: کافران سخن مؤمنان مستبعد میداشتند در اثبات نبوت و رسالت صالح، میگفتند: اللّهم ان کان ما یقولونه حقا فانزل علینا العذاب، و ذلک فی قوله تعالی: ائْتِنا بِما تَعِدُنا إِنْ کُنْتَ مِنَ الْمُرْسَلِینَ.
Солеҳи ҷавоб эшон дод , гуфт ё қавм : лами тстъҷлўни болсиӣаҳ қабл алҳасана ? сиӣаҳи ӣнҷо уқубатасту ҳасанаи тўбту маънӣ қабл ӣнҷо на тақаддум замонаст бал ки тақаддуми ртбт ва ихтиёраст , ҳамчунонаст ки касе гуяд : саҳаи албдн қабл ксраҳи алмол . Мегуяд эй қавм чаро уқубату азоби пеш аз тўбт бостъҷол мехоҳед ? он уқубату азоб ки ман шуморо бон май тарсонам ва шумо дар ақл раво медоред ки тавонад буд . Чаро бон мешитобид ва бар саломати оҷилу саодати оҷл ихтиёр мекунед чаро на аз аллоҳ омурзиш хоҳеду тўбту раҳмат то магар бар шумо бибахшоед .
صالح جواب ایشان داد، گفت یا قوم: لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِالسَّیِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ؟ سیّئة اینجا عقوبت است و حسنة توبت و معنی قَبْلَ اینجا نه تقدم زمان است بل که تقدّم رتبت و اختیارست، همچنانست که کسی گوید: صحة البدن قبل کثرة المال. میگوید ای قوم چرا عقوبت و عذاب پیش از توبت باستعجال میخواهید؟ آن عقوبت و عذاب که من شما را بآن میترسانم و شما در عقل روا میدارید که تواند بود. چرا بآن میشتابید و بر سلامت عاجل و سعادت آجل اختیار میکنید چرا نه از اللَّه آمرزش خواهید و توبت و رحمت تا مگر بر شما ببخشاید.
Қолўои атирнои бку бмни мък яъне ттирнои бк ,у алмънии тшأмнои бку бқўмку бмҷиӣк , ҳамонаст ки қавми Мӯсо бо Мӯсо гуфтанду аҳли антокиаҳ бо расӯлон хеш гуфтанд . Ва сабаби он буд ки чун бар пайғомбари хеш осӣ шуданду пайғомбарро дурӯғ зан гирифтанд раби Алъоламин борони раҳмат азишон боз гирифту қаҳту ниёз баришон гумошт то бсхтии расиданд ,у кзои суннатаи субҳонаи фии ахзҳми болбأсоءу алзроءи лълҳми ирҷъўн . Ҳамчунин қавми солеҳро қаҳту ниёз ва мҷоът расед , гуфтанд : дъўтки мшӣўмаҳи ълино , ин даъват ту шавам омад ки борону неъмат аз мо вои истод ,у ҳозои кони эътиқоди алъараби фии баъзи алўҳўшу алтиўри анҳо азои соҳти ман ҷониби дуни ҷониби дилати алии ҳудуси офоту балоё , ва наҳй расӯли аллоҳ ( с ) анҳо Фқоли ақрўои алтири алии мкнотҳои лонҳои авҳоми лои ҳқиқаҳи маъаҳо ,у алмкноти бизи алзб воҳдтҳо макунау ҳаии калимаи мустаъора ,у лақади аншдўо :
قالُوا اطَّیَّرْنا بِکَ وَ بِمَنْ مَعَکَ یعنی تطیّرنا بک، و المعنی تشأمنا بک و بقومک و بمجیئک، همانست که قوم موسی با موسی گفتند و اهل انطاکیه با رسولان خویش گفتند. و سبب آن بود که چون بر پیغامبر خویش عاصی شدند و پیغامبر را دروغزن گرفتند ربّ العالمین باران رحمت ازیشان باز گرفت و قحط و نیاز بریشان گماشت تا بسختی رسیدند، و کذا سنّته سبحانه فی اخذهم بالبأساء و الضّراء لعلهم یرجعون. همچنین قوم صالح را قحط و نیاز و مجاعت رسید، گفتند: دعوتک مشئومة علینا، این دعوت تو شوم آمد که باران و نعمت از ما وا ایستاد، و هذا کان اعتقاد العرب فی بعض الوحوش و الطّیور انّها اذا صاحت من جانب دون جانب دلّت علی حدوث آفات و بلایا، و نهی رسول اللَّه (ص) عنها فقال اقرّوا الطیر علی مکناتها لانّها اوهام لا حقیقة معها، و المکنات بیض الضّبّ واحدتها مکنة و هی کلمة مستعارة، و لقد انشدوا:
АлФолу алзҷру алрؤёи тъолил
الفال و الزجر و الرّؤیا تعالیل
Ва ллмнҷми аҳкоми аботил
و للمنجّم احکام اباطیل
Чун қавм солеҳ гуфтанд : атирнои бку бмни мъки солеҳ ҷавоб дод , гуфт : тоӣркм ъанд аллоҳи бали أнтми қавми тФтнўн , ончӣ шумо мепиндоред ки аз манаст аз нуқсони зрўъу смори он на аз манаст , ки он аз тақдир худост ва бомар худост . Шуморо бон озмоиш мекунад ки то худ ҳеҷ бедор шавед ва панд пазиред ва намепазиред ва намедонед . Ва қил тоӣркм ъанд аллоҳ , эй ҷзоء ттиркм ъанд аллоҳи маҳфӯзи алайкум ҳатто иҷозикм ба . Ва қили маъноаи алъзоби алмўъўд лакам ъанд аллоҳи аъзам ваашад ммои лҳқкми ман нуқсони алзрўъу алсмор . Бали أнтми қавми тФтнўн эй тсрФўни ани алтриқаҳи алмстқимаҳ . Ва алФтнаҳи сарфи алшии ءи ани алшии ء . Ва қили тФтнўн эй тзлўни Фтҷҳлўни ани алхиру алшр ман ъанд аллоҳ .
چون قوم صالح گفتند: اطَّیَّرْنا بِکَ وَ بِمَنْ مَعَکَ صالح جواب داد، گفت: طائِرُکُمْ عِنْدَ اللَّهِ بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ تُفْتَنُونَ، آنچه شما میپندارید که از من است از نقصان زروع و ثمار آن نه از منست، که آن از تقدیر خداست و بامر خداست. شما را بآن آزمایش میکند که تا خود هیچ بیدار شوید و پند پذیرید و نمیپذیرید و نمیدانید. و قیل طائِرُکُمْ عِنْدَ اللَّهِ، ای جزاء تطیّرکم عند اللَّه محفوظ علیکم حتی یجازیکم به. و قیل معناه العذاب الموعود لکم عند اللَّه اعظم و اشدّ ممّا لحقّکم من نقصان الزّروع و الثمار. بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ تُفْتَنُونَ ای تصرفون عن الطریقة المستقیمة. و الفتنة صرف الشیء عن الشیء. و قیل تُفْتَنُونَ ای تضلّون فتجهلون انّ الخیر و الشّر من عند اللَّه.
Ва кони фии алмдинаҳи тсъаҳи рҳти ман абноءи ашроФҳми фии Мадинаи самуду ҳай : алҳҷр , иФсдўни фии алأрзу лои ислҳўн эй ло икўн манеҳам алои алФсоди фии ҷамеъи амўрҳм ,у асмоؤҳм : қдори бен солФу мсдъи бен даҳру аслму рҳмӣ ва раҳему дъмӣу дъиму қиболу сдоФ .
و کانَ فِی الْمَدِینَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ من ابناء اشرافهم فی مدینة ثمود و هی: الحجر، یُفْسِدُونَ فِی الْأَرْضِ وَ لا یُصْلِحُونَ ای لا یکون منهم الّا الفساد فی جمیع امورهم، و اسماؤهم: قدار بن سالف و مصدع بن دهر و اسلم و رهمی و رهیم و دعمی و دعیم و قبال و صداف.
Ин ҷамоат бо якдигар гуфтанд : тқосмўои биллоҳ , амраст эй аҳлФўои биллоҳ .
این جماعت با یکدیگر گفتند: تَقاسَمُوا بِاللَّهِ، امر است ای احلفوا باللّه.
Лнбитнаҳи болтоءу зми алтоءи ассонӣа . Ин қироати Ҳамза ва ксоиӣаст . Ва ҳамчунин лтқўлни бтоءу зми лоам , маънӣ онаст ки савганд хуред бо якдигар ки шабихун кунед бар солеҳу касон ӯро он гуҳ вале дам ӯро гўӣид : мо шҳднои мӯҳлики أҳлаҳ бФтҳ мему лоами қироат ъосмаст ,у ҳўи алмсдр эй мо шҳднои ҳалоки аҳлау лами итързи лоҳлаҳи ФкиФ кно натаъарруз ?ла . ҲФс « мӯҳлик » бФтҳ мему каср лоам хонд . Ва ҳўи мавзеи алҳлок , эй мо ҳзрнои мавзеи ҳалокаи фузалои ани ани тўлиноаҳ , боқӣ бзм мему фатҳ лоам хонанду ҳўи алмўзъу алмсдри ҷмиъо ,у إнои лсодқўни фии қўлно : мо шҳднои мӯҳлики أҳлаҳ .
لَنُبَیِّتَنَّهُ بالتّاء و ضمّ التاء الثانیة. این قرائت حمزه و کسایی است. و همچنین لتقولنّ بتاء و ضمّ لام، معنی آنست که سوگند خورید با یکدیگر که شبیخون کنید بر صالح و کسان او را آن گه ولی دم او را گوئید: ما شَهِدْنا مَهْلِکَ أَهْلِهِ بفتح میم و لام قرائت عاصم است، و هو المصدر ای ما شهدنا هلاک اهله و لم یتعرّض لاهله فکیف کنّا نتعرّض له. حفص «مهلک» بفتح میم و کسر لام خواند. و هو موضع الهلاک، ای ما حضرنا موضع هلاکه فضلا عن ان تولّیناه، باقی بضمّ میم و فتح لام خوانند و هو الموضع و المصدر جمیعا، وَ إِنَّا لَصادِقُونَ فی قولنا: ما شَهِدْنا مَهْلِکَ أَهْلِهِ.
Ва мкрўои мкрои ҳайни қсдўои тбиити солеҳу алФтк бау мкрнои мкрои ҳайни адинои мкрҳми илои ҳлокҳм ва ҳам лои ишърўни брҷўъу боли мкрҳми алайҳим .
وَ مَکَرُوا مَکْراً حین قصدوا تبییت صالح و الفتک به وَ مَکَرْنا مَکْراً حین ادّینا مکرهم الی هلاکهم وَ هُمْ لا یَشْعُرُونَ برجوع و بال مکرهم علیهم.
Фонзри Киеви кони оқибаи мкрҳм эй Фонзр ё Муҳамади бъини қлбку ъқлки илои оқибаи макри самуди бнбиҳми солеҳи Киеви канту илои мо зои сорт ,у аълами ании фоил мисли злки бкФори қўмки фии алўқти алмўқти ?лаами Флисўо хиро манеҳам . Сами Фсри злки Фқол : أнои дмрноҳм , бФтҳи алифи қироати кӯфӣ ва ёқӯбасту боқии бкср алиф хонанд , Фмни фатҳи ҷаъли алҷмлаҳи хабари кон ва ман касри вақфи алии оқибаи мкрҳм , сами астأнФу қол : أнои дмрноҳм , эй анои аҳлкнои алрҳту қўмҳми أҷмъин . Алдмору алтдмири истисоли алшии ءи болҳлок , қоли ибни аббос : арсли аллоҳи алмлоӣкаҳи Лайлои Фомтлأти баҳами дори солеҳи Фотии алтсъаҳи ?илдори шоҳрини сиўФҳми Фрмтҳми алмлоикаҳи болҳҷораҳи ман ҳайси ирўни алҳҷораҳу лои ирўни алмлоӣкаҳи Фқтлтҳм . Қоли мақотил : нзлўои фии сФҳи ҷабали интзри бъзҳм баъзан лиأтўои дори солеҳ , Фонҳтти алайҳими сахраи Фҳшмтҳм .
فَانْظُرْ کَیْفَ کانَ عاقِبَةُ مَکْرِهِمْ ای فانظر یا محمد بعین قلبک و عقلک الی عاقبة مکر ثمود بنبیّهم صالح کیف کانت و الی ما ذا صارت، و اعلم انّی فاعل مثل ذلک بکفّار قومک فی الوقت الموقّت لهم فلیسوا خیرا منهم. ثمّ فسّر ذلک فقال: أَنَّا دَمَّرْناهُمْ، بفتح الف قرائت کوفی و یعقوب است و باقی بکسر الف خوانند، فمن فتح جعل الجملة خبر کانَ و من کسر وقف علی عاقِبَةُ مَکْرِهِمْ، ثمّ استأنف و قال: أَنَّا دَمَّرْناهُمْ، ای انّا اهلکنا الرّهط وَ قَوْمَهُمْ أَجْمَعِینَ. الدّمار و التدمیر استیصال الشیء بالهلاک ، قال ابن عباس: ارسل اللَّه الملائکة لیلا فامتلأت بهم دار صالح فاتی التسعة الدّار شاهرین سیوفهم فرمتهم الملایکة بالحجارة من حیث یرون الحجارة و لا یرون الملائکة فقتلتهم. قال مقاتل: نزلوا فی سفح جبل ینتظر بعضهم بعضا لیأتوا دار صالح، فانحطّت علیهم صخرة فهشمتهم.
Фтлки биўтҳми ишораи илои алҳҷри хоўиаҳ эй хрбаҳи холӣаи ани алоҳлу алскон . Хоўиаҳи насби алии улҳоли бмои злмўо эй бзлмҳму шркҳм . إни фии злк эй фии аҳлокнои аёҳми лоиаҳ эй даллолаи лқўми иълмўни Фитъзўн .
فَتِلْکَ بُیُوتُهُمْ اشارة الی الحجر خاوِیَةً ای خربة خالیة عن الاهل و السّکان. خاویة نصب علی الحال بِما ظَلَمُوا ای بظلمهم و شرکهم. إِنَّ فِی ذلِکَ ای فی اهلاکنا ایّاهم لَآیَةً ای دلالة لِقَوْمٍ یَعْلَمُونَ فیتّعظون.
Ва أнҷинои аллазӣнаи омнўои бсолҳу конўои итқўни овомири аллоҳи ани итркўҳоу конўои арбаъаи олоФи харҷи баҳами солеҳи илои ҳзрмўт ,у саммии ҳзрмўти лони солҳои лмои дахлҳо мот .
وَ أَنْجَیْنَا الَّذِینَ آمَنُوا بصالح وَ کانُوا یَتَّقُونَ اوامر اللَّه ان یترکوها و کانوا اربعة آلاف خرج بهم صالح الی حضرموت، و سمّی حضرموت لان صالحا لمّا دخلها مات.
Ва лўто эй азкри лўтои إзи қоли лқўмаҳи алии ваҷҳи алонкори алайҳими أи тأтўни алФоҳшаҳ яъне ?утёни аззикрону أнтми тбсрўн яънеу ҳолкми ани лаками бсроу уламои бқбҳи мо тФълўн . Ва анмои қоли злки лони феъли алқбиҳу ани кони қбиҳои ман ҷамеъи анноси Фҳўи ммни иълми қубҳаи ақбҳ . Ва қили албсри ҳоҳнои алъқл . Ва қили маъноаи ирии бъзкм баъзану конўои лои исттрўн ътўо манеҳаму тмрдо .
وَ لُوطاً ای اذکر لوطا إِذْ قالَ لِقَوْمِهِ علی وجه الانکار علیهم أَ تَأْتُونَ الْفاحِشَةَ یعنی اتیان الذّکران وَ أَنْتُمْ تُبْصِرُونَ یعنی و حالکم انّ لکم بصرا و علما بقبح ما تفعلون. و انّما قال ذلک لانّ فعل القبیح و ان کان قبیحا من جمیع الناس فهو ممّن یعلم قبحه اقبح. و قیل البصر هاهنا العقل. و قیل معناه یری بعضکم بعضا و کانوا لا یستترون عتوّا منهم و تمرّدا.
أи إнкми лтأтўни алрҷоли шҳўаҳи ман дуни алнсоءи ҳозои тафсири ллФоҳшаҳи алтии анкри алайҳими атёнҳои мубсирину аъоди лафзи алостФҳоми зиёдаи фии алонкор . Ва қили ҳўи тавбихи баъди тавбихи кқўли алқоӣл : ?илами анҳк , ?илами аъзки бали أнтми қавми тҷҳлўн эй ҷаҳлаи бъзими ҳақи аллоҳи алайкум . Ани қили Киеви всФҳми болбсираҳи сами қоли бъқбаҳ : бали أнтми қавми тҷҳлўн , Фолҷўоби ани бали нафии лФъли тўҷбаҳи албсираҳ эй лаками басирау тъмлўни амали алҷҳол . Ва қили бали أнтми қавми тҷҳлўни алъзоби алмўъўди алии ҳзаҳи алФоҳшаҳу тҷҳлўн , оқибаи амркм .
أَ إِنَّکُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجالَ شَهْوَةً مِنْ دُونِ النِّساءِ هذا تفسیر للفاحشة التی انکر علیهم اتیانها مبصرین و اعاد لفظ الاستفهام زیادة فی الانکار. و قیل هو توبیخ بعد توبیخ کقول القائل: الم انهک، الم اعظک بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ ای جهلة بعظیم حق اللَّه علیکم. ان قیل کیف وصفهم بالبصیرة ثمّ قال بعقبه: بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ، فالجواب انّ بَلْ نفی لفعل توجبه البصیرة ای لکم بصیرة و تعملون عمل الجهّال. و قیل بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ العذاب الموعود علی هذه الفاحشة و تجهلون، عاقبة امرکم.
Фмои кони ҷавоби қавмаи إлои أни қолўои أхрҷўои оли лути ман қриткми إнҳми أноси иттҳрўни итҳрҷўну итнзҳўн ъмо наамал . Иқўлўни злки алии сиблати алостҳзоء .
فَما کانَ جَوابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَنْ قالُوا أَخْرِجُوا آلَ لُوطٍ مِنْ قَرْیَتِکُمْ إِنَّهُمْ أُناسٌ یَتَطَهَّرُونَ یتحرّجون و یتنزّهون عمّا نعمل. یقولون ذلک علی سبیل الاستهزاء.
Фأнҷиноаҳу أҳлаҳи إлои амрأтаҳи қдрноҳои ман алғобрин , эй лмои тъотўои мо тъотўаҳи хлснои лўто ва ман омни маъааи ман қавмаи ман тлки алмдни бони амрнои ҳам болхрўҷи минҳо , إлои амрأтаҳи алкоФраҳи Фонои тркноҳои маъаи алмқимин . Ва алғобри албоқӣ , иқол : ғбри ғбўрои азои бқӣ . Ва қрأи абӯи бикри қдрноҳои мухаффафау алтхўиФу алтшдиди фии алмънии воҳид , эй бтқдири мнои ҷълноҳои ман албоқин .
فَأَنْجَیْناهُ وَ أَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْناها مِنَ الْغابِرِینَ، ای لمّا تعاطوا ما تعاطوه خلّصنا لوطا و من آمن معه من قومه من تلک المدن بان امرنا هم بالخروج منها، إِلَّا امْرَأَتَهُ الکافرة فانّا ترکناها مع المقیمین. و الغابر الباقی، یقال: غبر غبورا اذا بقی. و قرأ ابو بکر قَدَّرْناها مخفّفة و التخویف و التشدید فی المعنی واحد، ای بتقدیر منّا جعلناها من الباقین.
Ва أмтрнои алайҳими мтрои ман сҷили Фсоءи мтри алмнзрин эй бӣси мтри ман анзрўои Флми ихоФўо .
وَ أَمْطَرْنا عَلَیْهِمْ مَطَراً من سجّیل فَساءَ مَطَرُ الْمُنْذَرِینَ ای بئس مطر من انذروا فلم یخافوا.