Ин сӯра аз шумори кӯфӣони бист оятаст , дивист ва ҳаштод ва панҷ калима , ҳаштсад ва сӣ ва ҳашт ҳарф , ҷумла ба Макка фурӯ омад ва дар ?маккейот шимуранд . Ибн аббос гуфт : магар дар ояти إни рбки иълми илои охири алсўраҳ . Ва дарин сӯраи се оят мансӯхаст .
این سوره از شمار کوفیان بیست آیت است، دویست و هشتاد و پنج کلمه، هشتصد و سی و هشت حرف، جمله به مکه فرو آمد و در مکّیّات شمرند. ابن عباس گفت: مگر در آیت إِنَّ رَبَّکَ یَعْلَمُ الی آخر السّورة. و درین سوره سه آیت منسوخ است.
Дар аввали сӯраи намози шаб фарз карданд бар расӯли худо ( с ) ва бар мусулмонону злки фии қавла : Қуми аллили إлои қлилои алоиаҳ . . . Пас охири сӯра мансӯх шуду злки қавла : илми أни лни тҳсўаҳи Фтоби алайкуми Фоқрؤои мо тисри ман алқуръон .
در اوّل سوره نماز شب فرض کردند بر رسول خدا (ص) و بر مسلمانان و ذلک فی قوله: قُمِ اللَّیْلَ إِلَّا قَلِیلًا الآیة... پس آخر سوره منسوخ شد و ذلک قوله: عَلِمَ أَنْ لَنْ تُحْصُوهُ فَتابَ عَلَیْکُمْ فَاقْرَؤُا ما تَیَسَّرَ مِنَ الْقُرْآنِ.
Дигари оя :у аҳҷрҳми ҳҷрои ҷмило мансӯхаст боити сайф .
دیگر آیه: وَ اهْجُرْهُمْ هَجْراً جَمِیلًا منسوخ است بآیت سیف.
Сдигри ояти Фмни шоءи атхзи إлии рабаи сбилои ин қадар аз оят мансӯхаст бончаҳи раб алъзаҳ гуфт : ва мо тшоؤни إлои أни ишоءи аллоҳ ва дар фазилати сӯраи абии бен каъб ривоят кунад аз
سدیگر آیت فَمَنْ شاءَ اتَّخَذَ إِلی رَبِّهِ سَبِیلًا این قدر از آیت منسوخ است بآنچه ربّ العزّة گفت: وَ ما تَشاؤُنَ إِلَّا أَنْ یَشاءَ اللَّهُ و در فضیلت سوره ابی بن کعب روایت کند از
Мустафо ( с ) қол : « ман қрأи сӯра ё аиҳо алмзмли рафъи анҳу алъсри фии алднёу алохраҳ » .
مصطفی (ص) قال: «من قرأ سورة یا ایها المزمل رفع عنه العسر فی الدّنیا و الآخرة».
Қавла : ё أиҳои алмзмли маъноаи алмтзмли адғмти алтоءи фии алзоӣ ва мислаи алмдср эй алмтдсри адғмти алтоءи фии алдол . Иқоли тзмлу тдсри бсўбаҳи азои тғтӣ ба . Қоли ибни аббос : рҷъ алнабӣ ( с ) ман ҷабали ҳроء лмо назул алайҳи Ҷабраил ( ъ ) мзъўрои мртъдои Фроӣсаҳ , иқўл : змлўнии змлўнӣ , Фзмли бқтиФаҳ . Фнзлт : ё أиҳои алмзмл эй алмтлФФи бсёбаҳ , қил : кони мтлФФои фии сёби нўмаҳ ,у қил : кони мтлФФои бсёбаҳи ллслўаҳ . Қоли ъкрмаҳ : алзмли бмънии алҳмл ва манеҳ алзомлаҳ ,у алмънӣ : ё аиҳо алмтҳмли боъбоءи алнбўаҳу қоли Ассадӣ : ҳўи кинояи ани алноӣми конаи ъзу ҷли иқўл : аиҳо алноӣми аллили каллаи Қуми фасли қоли баъзи алҳкмоء : кони ҳозои улхитоби ллнбӣ ( с ) қабл таблиғи алрсолаҳу лами икни қади шаръи фии аламри баъди Флмои шаръи хотбаҳи болнбўаҳу алрсолаҳ . Ва қил : ҳозои бдои аиносу азолаҳи ваҳшаи комаи қол : « ва мо тлки биминк ё Мӯсо » . Ва қили маъноа : ё хомли аззикри снрФъи лаки зкрк .
قوله: یا أَیُّهَا الْمُزَّمِّلُ معناه المتزمّل ادغمت التّاء فی الزّای و مثله المدّثّر ای المتدّثر ادغمت التّاء فی الدّال. یقال تزمّل و تدثّر بثوبه اذا تغطّی به. قال ابن عباس: رجع النّبی (ص) من جبل حراء لما نزل علیه جبرئیل (ع) مذعورا مرتعدا فرائصه، یقول: زمّلونی زمّلونی، فزمّل بقطیفة. فنزلت: یا أَیُّهَا الْمُزَّمِّلُ ای المتلفّف بثیابه، قیل: کان متلفّفا فی ثیاب نومه، و قیل: کان متلفّفا بثیابه للصّلوة. قال عکرمة: الزّمل بمعنی الحمل و منه الزّاملة، و المعنی: یا ایّها المتحمّل باعباء النّبوّة و قال السدی: هو کنایة عن النّائم کانّه عزّ و جلّ یقول: ایها النائم اللیل کله قم فصل قال بعض الحکماء: کان هذا الخطاب للنّبی (ص) قبل تبلیغ الرّسالة و لم یکن قد شرع فی الامر بعد فلمّا شرع خاطبه بالنّبوّة و الرّسالة. و قیل: هذا بدا ایناس و ازالة وحشة کما قال: «وَ ما تِلْکَ بِیَمِینِکَ یا مُوسی». و قیل معناه: یا خامل الذّکر سنرفع لک ذکرک.
Қуми аллил эй сли аллили إлои қлило эй алои шиӣои исирои тноми фӣау кони қиёми аллили фаризаи фии абтдоءи алислому байни қадараи Фқол : нисфаи أў анқс манеҳ қлилои илои алслс أў зад алии алнсФи илои алслсини хираи байни ҳзаҳи алмнозли факон алнабӣ ( с )у асҳобаи иқўмўни алии ҳзаҳи алмқодир , факони алрҷли лои идрии маттии сулси аллилу маттии алнсФу маттии алслсони факони иқўм ҳатто исбҳи мхоФаҳи ани лои иҳФзи алқдри алўоҷбу Аштади злки алайҳим ҳатто антФхти ақдомҳми Фрҳмҳми аллоҳу хФФаҳи анҳуам баъди санау насхи вуҷуби алтқдири бқўлаҳ : илми أни лни тҳсўаҳи Фтоби алайкуми Фоқрؤои мо тисри ман алқуръон эй слўои мо тисри ман алқуръон , эй слўои мо тисри ман алслоаҳу луи қадари ҳалаби шоҳи сами насхи вуҷуби қиёми аллили болслўоти алхмси баъди санаи ахрии факони байни алўҷўбу алтхФиФи санау байни алўҷўбу алнсхи болклиаҳи синатон .
قُمِ اللَّیْلَ ای صلّ اللّیل إِلَّا قَلِیلًا ای الا شیئا یسیرا تنام فیه و کان قیام اللّیل فریضة فی ابتداء الاسلام و بیّن قدره فقال: نِصْفَهُ أَوِ انْقُصْ مِنْهُ قَلِیلًا الی الثّلث أَوْ زِدْ علی النّصف الی الثّلثین خیّره بین هذه المنازل فکان النّبی (ص) و اصحابه یقومون علی هذه المقادیر، فکان الرّجل لا یدری متی ثلث اللّیل و متی النّصف و متی الثّلثان فکان یقوم حتّی یصبح مخافة ان لا یحفظ القدر الواجب و اشتدّ ذلک علیهم حتّی انتفخت اقدامهم فرحمهم اللَّه و خفّفه عنهم بعد سنة و نسخ وجوب التّقدیر بقوله: عَلِمَ أَنْ لَنْ تُحْصُوهُ فَتابَ عَلَیْکُمْ فَاقْرَؤُا ما تَیَسَّرَ مِنَ الْقُرْآنِ ای صلّوا ما تیسّر من القرآن، ای صلّوا ما تیسّر من الصّلاة و لو قدر حلب شاة ثمّ نسخ وجوب قیام اللّیل بالصّلوات الخمس بعد سنة اخری فکان بین الوجوب و التّخفیف سنة و بین الوجوب و النّسخ بالکلّیّة سنتان.
Ва ртли алқуръони тртило эй байни алҳрўФу вФи ҳақҳо ман алошбоъи конки тФсли байни алҳрФу алҳрФи муштақи ман қавли алъараби сғри ртлу ртли азои кони фӣаи фараҷ . Ва алтртили адоءи алҳрўФу ҳифзи алўқўФ . Ва қил : маъноаи ақрأи алии тартибаи лои тақаддуми мؤхроу лои тؤхри мқдмо . Ва қил : фаслаи тФсилоу лои тъҷли фии қроءтаҳ . Ва қил : маъноа : заъфи сўтку ақрأаҳи бсўти ҳазин , ва қолатам слмаҳ : кони расӯли аллоҳ ( с ) иқтъи қроءтаҳи ояи оя .
وَ رَتِّلِ الْقُرْآنَ تَرْتِیلًا ای بیّن الحروف و وفّ حقّها من الاشباع کانّک تفصل بین الحرف و الحرف مشتقّ من قول العرب ثغر رتل و رتل اذا کان فیه فرج. و التّرتیل اداء الحروف و حفظ الوقوف. و قیل: معناه اقرأ علی ترتیبه لا تقدّم مؤخّرا و لا تؤخّر مقدّما. و قیل: فصّله تفصیلا و لا تعجل فی قراءته. و قیل: معناه: ضعّف صوتک و اقرأه بصوت حزین، و قالت امّ سلمة: کان رسول اللَّه (ص) یقطع قراءته آیة آیة.
Ва қоли ибни масъӯд : лои тнсрўаҳи насри алдқл . Ва лои тҳзўаҳи ҳзи алшър . ҚФўо ъанд ъҷоӣбаҳ . Ва ҳркўо ба улқулуб .
و قال ابن مسعود: لا تنثروه نثر الدّقل. و لا تهذّوه هذّ الشّعر. قفوا عند عجائبه. و حرّکوا به القلوب.
Ва лои икни ҳам аҳдкми охири алсўраҳ .
و لا یکن همّ احدکم آخر السّورة.
Сӣли инс : Киеви канти қроءаҳ алнабӣ ( с ) ? Фқол : канти мдоءи сами қрأи бисмии аллоҳи арраҳмони арраҳими имди ббсми аллоҳу имди болрҳмни имди болрҳим .
سئل انس: کیف کانت قراءة النّبی (ص)؟ فقال: کانت مدّاء ثمّ قرأ بسم اللَّه الرّحمن الرّحیم یمدّ ببسم اللَّه و یمدّ بالرّحمن یمدّ بالرّحیم.
Рӯй ани умри ани бен ҳсини мари алии қоси иқрأи сами исأли Фострҷъи сами қоли самъати расӯли аллоҳ ( с ) иқўл : « ман қрأи алқуръони Флисأли аллоҳ ба ?фонаи сиҷии ءи ақвоми иқрءўни алқуръони исأлўн ба аннос .
روی انّ عمر ان بن حصین مرّ علی قاصّ یقرأ ثمّ یسأل فاسترجع ثمّ قال سمعت رسول اللَّه (ص) یقول: «من قرأ القرآن فلیسأل اللَّه به فانّه سیجیء اقوام یقرءون القرآن یسألون به النّاس.
إнои снлқии алейк эй сннзли алейк қўлои сқило яъне алқуръони Фолқрони рузин Карими рсин , лӣси бҳзлу лои сФсоФ , ?лаи вазну хатари фии сиҳҳата ва беона комаи иқол : ҳозои қавли ?лаи вазну хатар . Қоли ҷаъфар : мо сиқлаи фии таловатаи анмои сиқлаи фии алъамал ба . Ва қил : сиқлаи болأмру алнҳӣу алҳдўду алоҳком . Ва қил : сқилои лсқлаҳи фии алмизони явми алҳсоб .
إِنَّا سَنُلْقِی عَلَیْکَ ای سننزل علیک قَوْلًا ثَقِیلًا یعنی القرآن فالقرآن رزین کریم رصین، لیس بهزل و لا سفساف، له وزن و خطر فی صحّته و بیانه کما یقال: هذا قول له وزن و خطر. قال جعفر: ما ثقله فی تلاوته انّما ثقله فی العمل به. و قیل: ثقله بالأمر و النّهی و الحدود و الاحکام. و قیل: ثقیلا لثقله فی المیزان یوم الحساب.
Ва қил : сқилои алии алкФору алмноФқину яҳтамили ани икўни сқилои сафаи ллмсдр эй илқоъи сқилои лмо
و قیل: ثقیلا علی الکفّار و المنافقین و یحتمل ان یکون ثقیلا صفة للمصدر ای القاء ثقیلا لما
Рӯй ани ъоӣшаҳи қолат : лақади рأитаҳи инзли алайҳи алўҳии фии алиўми алшдиди албрди ФинФсми анҳуу ани ҷабинаи лирФзи ърқо
روی عن عائشة قالت: لقد رأیته ینزل علیه الوحی فی الیوم الشّدید البرد فینفصم عنه و انّ جبینه لیرفضّ عرقا
Ва қоли ибни аббос : нзлти сӯраи алонъоми Фбркти ноқаи расӯли аллоҳ ( с ) ман сиқли алқуръону ҳайбата . Ва маънии сиқли алқуръони ҳибаҳи алқуръон . Ва рӯй : ани алҳорси бен Њишоми сأли расӯли аллоҳ ( с ) Фқол : ё расӯли аллоҳи Киеви иأтики алўҳӣ ? Фқол : « аҳёнан иأтинӣ мисли слслаҳи алҷрсу ҳўашад алии ФинФсми анӣу қади въити мо қол ва аҳёнан итмсли лии алмалики рҷлои Фиклмнии Фоъии мо иқўл » .
و قال ابن عباس: نزلت سورة الانعام فبرکت ناقه رسول اللَّه (ص) من ثقل القرآن و هیبته. و معنی ثقل القرآن هیبة القرآن. و روی: انّ الحارث بن هشام سأل رسول اللَّه (ص) فقال: یا رسول اللَّه کیف یأتیک الوحی؟ فقال: «احیانا یأتینی مثل صلصلة الجرس و هو اشدّ علیّ فینفصم عنّی و قد وعیت ما قال و احیانا یتمثّل لی الملک رجلا فیکلّمنی فاعی ما یقول».
Қавлаи إни ношӣаҳи аллил эй соъотаи кулҳоу кули соъаҳи минҳои ношӣаҳи самяти бзлки лонҳои тншأи баъди алнҳор эй тбдўи Фкли мо ҳдси боллилу бдои Фқди ншأу ҳўи ношӣу алҷмъи ношӣаҳ . Қоли ибни абии мликаҳ : сأлти ибни аббосу ибни алзбири анҳо , Фқоло : аллили каллаи ношӣаҳ . Қоли Саиди бен ҷбиру ибни алзбир эй соъаҳи қоми ман аллили Фқди ншоءу ҳўи блсони алҳбши ншأи фалон эй қоми Фқолти ъоӣшаҳ : алношӣаҳ : алқёми баъди алнўм . Ва қоли ибни кисон : ҳаии алқёми ман охири аллил . Ва қоли ъкрмаҳ : ҳаии алқёми ман аввали аллил .
قوله إِنَّ ناشِئَةَ اللَّیْلِ ای ساعاته کلّها و کلّ ساعة منها ناشئة سمّیت بذلک لانّها تنشأ بعد النّهار ای تبدو فکلّ ما حدث باللّیل و بدا فقد نشأ و هو ناشئ و الجمع ناشئة. قال ابن ابی ملیکة: سألت ابن عباس و ابن الزبیر عنها، فقالا: اللّیل کلّه ناشئة. قال سعید بن جبیر و ابن الزبیر ایّ ساعة قام من اللّیل فقد نشاء و هو بلسان الحبش نشأ فلان ای قام فقالت عائشة: النّاشئة: القیام بعد النّوم. و قال ابن کیسان: هی القیام من آخر اللّیل. و قال عکرمة: هی القیام من اوّل اللّیل.
Рӯй ани алии бен алҳусайн ъалиҳумо ассаломи анаи кони ислии баъди алмғрбу алъшоءу иқўл : ҳозои ношӣаҳи аллил .
روی عن علیّ بن الحسین علیهما السّلام انّه کان یصلّی بعد المغرب و العشاء و یقول: هذا ناشئة اللّیل.
Ва қоли алазҳарӣ : ношӣаҳи аллили қиёми аллил . Масдари ҷоءи алии фоилаи колъоФиаҳи бмънӣ : алъФў , эй мо иншӣаҳи алрҷли боллили ман алқроءаҳу алслоаҳ . Ҳаии أшди втӣои қроءи ибни омиру абӯи Амру тоءи бксри алўоўи ммдўдои бмънии алмўотоаҳу алмўоФқаҳ . Иқол : вотأти Флонои мўотоаҳу втأи азои воФқтаҳу злки ани мўотоаҳи алқлбу алсмъу албсру аллсони боллили икўни аксари ммои икўни болнҳор , эй أҷдри أни иўотأи аллсони алқлбу алқлби алъамали лони аллили тҳдأи фӣаи алосўоти Флои иҳўли дуни тФҳмаҳи шайъи ء . Ва қрأи алохрўни أшди втӣои бФтҳи алўоўу сукӯни алтоء эйашад алии алмслӣу асқли алии албдни ман салоаи алнҳори лони аллили ллнўму алроҳаҳ , Фозои азили ани злки сиқли алии албдни мо итклФи фӣа . Ва манеҳ
و قال الازهری: ناشئة اللّیل قیام اللّیل. مصدر جاء علی فاعلة کالعافیة بمعنی: العفو، ای ما ینشئه الرّجل باللّیل من القراءة و الصّلاة. هِیَ أَشَدُّ وَطْئاً قراء ابن عامر و ابو عمرو و طاء بکسر الواو ممدودا بمعنی المواطاة و الموافقة. یقال: واطأت فلانا مواطاة و وطأ اذا وافقته و ذلک ان مواطاة القلب و السّمع و البصر و اللّسان باللّیل یکون اکثر ممّا یکون بالنّهار، ای أجدر أن یواطأ اللّسان القلب و القلب العمل لانّ اللّیل تهدأ فیه الاصوات فلا یحول دون تفهّمه شیء. و قرأ الآخرون أَشَدُّ وَطْئاً بفتح الواو و سکون الطّاء ای اشدّ علی المصلّی و اثقل علی البدن من صلاة النّهار لانّ اللّیل للنّوم و الرّاحة، فاذا ازیل عن ذلک ثقل علی البدن ما یتکلّف فیه. و منه
Қавлаи слии аллоҳи алайҳу силам : « аллоҳами ашдди втأтки алии музир »
قوله صلّی اللَّه علیه و سلّم: «اللّهم اشدد وطأتک علی مضر»
эй ашдди сиқли алأмри алайҳим . Ва қил : « أшди втӣо » эй асбти фии алқлб ,у аҳФзи ллқроءаҳу аблғи фии алсўоб ,у асҳли алии алмслии ман соъоти алнҳори лони алнҳори халқи лтсрФи алъбоди фӣау аллили халқи ллнўму алхлўаҳи ман алъамали Фолъбодаҳи фӣаи асҳл . Ва أқўми қило эй асўби қроءаҳ ,у асҳи қўло , ваашад астқомаҳи лФроғи алболу ҳдоаҳи анносу сукӯни алосўот . Иқол : қоли қилоу қўлоу мқолоу мақолау қоло . Ва қоли алҳсни азои қоми аҳдкми ман аллили Флисмъ нафса .
ای اشدد ثقل الأمر علیهم. و قیل: «أَشَدُّ وَطْئاً» ای اثبت فی القلب، و احفظ للقراءة و ابلغ فی الثّواب، و اسهل علی المصلّی من ساعات النّهار لانّ النهار خلق لتصرّف العباد فیه و اللّیل خلق للنّوم و الخلوة من العمل فالعبادة فیه اسهل. وَ أَقْوَمُ قِیلًا ای اصوب قراءة، و اصحّ قولا، و اشدّ استقامة لفراغ البال و هداة النّاس و سکون الاصوات. یقال: قال قیلا و قولا و مقالا و مقالة و قالا. و قال الحسن اذا قام احدکم من اللّیل فلیسمع نفسه.
?фони алмлоӣкаҳи лои иқрءўни алқуръон ва ҳам иҳбўни ани исмъўаҳи ман банӣ одам . Ва қил : أқўми қило эй аъҷли аҷобаҳи ллдъоء .
فانّ الملائکة لا یقرءون القرآن و هم یحبّون ان یسمعوه من بنی آدم. و قیل: أَقْوَمُ قِیلًا ای اعجل اجابة للدّعاء.
إни лаки фии алнҳори сбҳои тўилои ?лаи маънӣон : аҳдҳмо : ани лаки фии алнҳори Фроғоу тсрФоу тқлбои тўилои тқдри أни тсбҳи фии ҳўоӣҷку ашғолки болнҳор . Ва асли алсбҳи сръаҳи алзҳоб ва манеҳ алсбоҳаҳи фии алмоء . Ва алмънии ассонии إни лаки фии алнҳори сбҳои тўило эй Фроғои ллнўми Фқми аллилу нами болнҳор . Ва қил : маънии алоиаҳи мзоҳбки болнҳори Фимои ишғлки касӣрау аллил , ахлии лаку аъўни алии въии мо иўҳии алики Фқми ман нўмки боллил . Ва қрأи яҳёи бен иъмр : сбхои болхоءи алмъҷмаҳ , эй астроҳаҳу тхФиФои ллбдн ва манеҳ
إِنَّ لَکَ فِی النَّهارِ سَبْحاً طَوِیلًا له معنیان: احدهما: انّ لک فی النّهار فراغا و تصرّفا و تقلّبا طویلا تقدر أن تسبح فی حوائجک و اشغالک بالنّهار. و اصل السّبح سرعة الذّهاب و منه السّباحة فی الماء. و المعنی الثّانی إِنَّ لَکَ فِی النَّهارِ سَبْحاً طَوِیلًا ای فراغا للنّوم فقم اللّیل و نم بالنّهار. و قیل: معنی الآیة مذاهبک بالنّهار فیما یشغلک کثیرة و اللّیل، اخلی لک و اعون علی وعی ما یوحی الیک فقم من نومک باللّیل. و قرأ یحیی بن یعمر: سبخا بالخاء المعجمة، ای استراحة و تخفیفا للبدن و منه
Қавл алнабӣ ( с ) лъоӣшаҳу қади дъти алии сориқи лои тсбхии анҳу бдъоӣки алайҳ .
قول النّبی (ص) لعائشة و قد دعت علی سارق لا تسبّخی عنه بدعائک علیه.
Ва азкри исми рбки болтўҳиду алтъзиму адъаҳи босмоӣаҳи алҳснӣу қил : маъноа : азкр : « бисмии аллоҳи арраҳмони арраҳим » азои ардти қроءаҳи алқуръон ӯ алслоаҳу тбтли إлиаҳи тбтило эй анқтъи илайҳи анқтоъоу ахлси ?лаи алъбодаҳи ахлосо . Ва таваккули алайҳи тўкло .
وَ اذْکُرِ اسْمَ رَبِّکَ بالتّوحید و التّعظیم و ادعه باسمائه الحسنی و قیل: معناه: اذکر: «بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمنِ الرَّحِیمِ» اذا اردت قراءة القرآن او الصّلاة وَ تَبَتَّلْ إِلَیْهِ تَبْتِیلًا ای انقطع الیه انقطاعا و اخلص له العبادة اخلاصا. و توکّل علیه توکّلا.
Ва қил : алтбтли рФзи алднё ва мо фӣҳоу илтимос мо ъанд аллоҳ . Асли алтбтли алқтъ . Иқол : тсдқи фалони садақаи бтлаҳ , эй қатъҳо ман мола ,у ахрҷҳои ман яда . Ва қили лмрим : албтўл , лқтъҳои алднё ва асбобҳо ва инқитоъҳо ани аннос . Ва алқёси тбтлоу локини лмои кони алтбтили ман ҳуруфаи адли илайҳи лмўоФқаҳи рؤси алоӣ , лони ҳаззи алқуръони ман ҳасани алнзму алрсФи фавқи кули ҳаззу яҳтамили ани алмънии тбтли илайҳи ибтлки тбтило , комаи қоли таъолӣ :у аллоҳи أнбткми ман алأрзи нбото эйу тнбтўни нбото .
و قیل: التّبتّل رفض الدّنیا و ما فیها و التماس ما عند اللَّه. اصل التّبتّل القطع. یقال: تصدّق فلان صدقة بتلة، ای قطعها من ماله، و اخرجها من یده. و قیل لمریم: البتول، لقطعها الدّنیا و اسبابها و انقطاعها عن النّاس. و القیاس تبتّلا و لکن لمّا کان التّبتیل من حروفه عدل الیه لموافقة رؤس الآی، لانّ حظّ القرآن من حسن النّظم و الرّصف فوق کلّ حظّ و یحتمل انّ المعنی تبتّل الیه یبتّلک تبتیلا، کما قال تعالی: وَ اللَّهُ أَنْبَتَکُمْ مِنَ الْأَرْضِ نَباتاً ای و تنبتون نباتا.
Раби алмшрқу алмғрби ирид ба ҷинси алмшорқу алмғорби фии алштоءу алсиФ эй холқҳмоу молкҳмо . Қрأи аҳли алҳҷозу абӯи Амру ҳФс « раб » брФъи албоء .
رَبُّ الْمَشْرِقِ وَ الْمَغْرِبِ یرید به جنس المشارق و المغارب فی الشّتاء و الصّیف ای خالقهما و مالکهما. قرأ اهل الحجاز و ابو عمرو و حفص «ربّ» برفع الباء.
Алии алобтдоءу қрأи алохрўни болҷри алии наъти алрби фии қавла :у азкри исми рбк .
علی الابتداء و قرأ الآخرون بالجرّ علی نعت الرّبّ فی قوله: وَ اذْکُرِ اسْمَ رَبِّکَ.
Лои إлаҳи إлои ҳўи Фотхзаҳи вкило эй таваккули алайҳу сқ бау асткФаҳи ҷамеъи алмҳмот .
لا إِلهَ إِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَکِیلًا ای توکّل علیه و ثق به و استکفه جمیع المهمّات.
Ва қил : вкило эй кФилои бмои въдки қимои бомўрк , ФФўзҳои илайҳ :у асбри алии мо иқўлўни ллаҳи ман алсоҳбаҳу алўлду алшрику лаки ман алсоҳру алкоҳну алмҷнўн . Ва аҳҷрҳми ҳҷрои ҷмилои алҳҷри алҷмили тарки алҷФўаҳи ман ғайри тарки алдъўаҳи ило алҳақ кқўлаҳ : « ФосФҳи алсФҳи алҷмил »у қавла : « ФосФҳи анҳуам ва қул салом »у ҳаии мансӯхаи боиаҳи алсиФ .
و قیل: وکیلا ای کفیلا بما وعدک قیّما بامورک، ففوّضها الیه: وَ اصْبِرْ عَلی ما یَقُولُونَ للَّه من الصّاحبة و الولد و الشّریک و لک من السّاحر و الکاهن و المجنون. وَ اهْجُرْهُمْ هَجْراً جَمِیلًا الهجر الجمیل ترک الجفوة من غیر ترک الدّعوة الی الحقّ کقوله: «فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَمِیلَ» و قوله: «فَاصْفَحْ عَنْهُمْ وَ قُلْ سَلامٌ» و هی منسوخة بآیة السّیف.
Ва зрнӣу алмкзбини лак ё Муҳамад « أўлии алнъмаҳ » эй алсрўаҳу алтнъму алмоли всФҳми болнъмаҳи тўбихои ?лаами алии тарки алшкру тбиинои анаи атғоҳми астғноؤҳм .
وَ ذَرْنِی وَ الْمُکَذِّبِینَ لک یا محمّد «أُولِی النَّعْمَةِ» ای الثّروة و التّنعّم و المال وصفهم بالنّعمة توبیخا لهم علی ترک الشّکر و تبیینا انّه اطغاهم استغناؤهم.
Ва мҳлҳми қлило эй анзрҳму ахрҳми қлилоу лои тҳтми баҳаму кули амрҳми илои фонии акФики шأнҳм . Қил : нзлти фии снодиди Қурайши алмстҳзӣин . Ва қоли мақотили нзлти фии алмтъмини ббдру кони байни нузули ҳзаҳи алоиаҳу байни бадари сана .
وَ مَهِّلْهُمْ قَلِیلًا ای انظرهم و اخّرهم قلیلا و لا تهتمّ بهم و کل امرهم الیّ فانّی اکفیک شأنهم. قیل: نزلت فی صنادید قریش المستهزئین. و قال مقاتل نزلت فی المطعمین ببدر و کان بین نزول هذه الآیة و بین بدر سنة.
إни лдино эй ани ънднои лоҳли алнор « أнколо » қиўдоу ағлолои аҳонаи ?лаами лои хўФои ман Фрорҳм «у ҷҳимо » эй норо ҷоҳмаҳи ҳораи мутаноҳӣа , иқол : явми ҷоҳми шадиди алҳр .
إِنَّ لَدَیْنا ای ان عندنا لاهل النّار «أَنْکالًا» قیودا و اغلالا اهانة لهم لا خوفا من فرارهم «وَ جَحِیماً» ای نارا جاحمة حارّة متناهیة، یقال: یوم جاحم شدید الحرّ.
Ва тъомои зои ғуссае алзриъу алзқўми иғси фии алҳлқу лои исўғ . Ва ъзобои أлимои ихлси вҷъаҳи илои алқлб . Ва ҷоءи фии алтФсири анаи лмои нзлти ҳзаҳи алоиаҳи хар алнабӣ ( с ) мғшёи алайҳ .
وَ طَعاماً ذا غُصَّةٍ ای الضّریع و الزّقّوم یغصّ فی الحلق و لا یسوغ. وَ عَذاباً أَلِیماً یخلص وجعه الی القلب. و جاء فی التّفسیر انّه لمّا نزلت هذه الآیة خرّ النّبی (ص) مغشیّا علیه.
Явми трҷФи алأрз эй ттҳрки аларзи ҳркаҳи шадидау тзўли алҷболи ани амокинҳо . Ва канти алҷболи ксибои мҳило эй рмлои соӣло .
یَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ ای تتحرّک الارض حرکة شدیدة و تزول الجبال عن اماکنها. وَ کانَتِ الْجِبالُ کَثِیباً مَهِیلًا ای رملا سائلا.
Қоли алклбӣ : ҳўи алрмли алзии азо ахзат манеҳ шиӣои тбъки мо баъдаи иқоли ҳиллати алрмли аҳилаҳи ҳилои азои ҳаракати асфала ҳатто анҳоли ман аълоа .
قال الکلبی: هو الرّمل الّذی اذا اخذت منه شیئا تبعک ما بعده یقال هلت الرّمل اهیله هیلا اذا حرکت اسفله حتّی انهال من اعلاه.
إнои أрслнои إликми рсўло яъне Муҳамад ( с ) шоҳдои алайкуми явми алқёмаҳи болоҷобаҳу аломтноъ . Комаи أрслнои إлии фиръавни рсўло яъне Мӯсо ( ъ ) .
إِنَّا أَرْسَلْنا إِلَیْکُمْ رَسُولًا یعنی محمد (ص) شاهِداً عَلَیْکُمْ یوم القیامة بالاجابة و الامتناع. کَما أَرْسَلْنا إِلی فِرْعَوْنَ رَسُولًا یعنی موسی (ع).
Фъсии фиръавн алрасул эй ҷҳди рисолаи Мӯсоу лами иؤмн ба . Фأхзноаҳи أхзои вбило эй шадидани сқило .
فَعَصی فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ ای جحد رسالة موسی و لم یؤمن به. فَأَخَذْناهُ أَخْذاً وَبِیلًا ای شدیدا ثقیلا.
ФкиФи ттқўни إни кФртми иўмои биллоҳу лами тؤмнўои азоби явми иҷъли алўлдони шибои лсъўбтаҳ ва шудаи аҳўолаҳ . Қил : ҳозои алии зарби алмисл ,у қил : бали исири алўлдони фии алқёмаҳи шибои лмои ирўни ман аҳўолҳо . Ва қил : анмои исирўни шибои азои қоли аллоҳи лодм : « Қуми Фобъси ман зритки баъси алнор » Фиқўл : « ё раби ман кам кам » . Фиқўл : « ман кули алифи тсъи моӣаҳу тсъаҳу тсъини илои алнору воҳдои илои алҷнаҳи Фҳинӣзи ишиби алўлдони ман алФзъ » . Ва қили маънии алоиаҳ : Киеви лаками болтқўии явми алқёмаҳи ази кФртми фии алднё эй лои сиблати лаками илои алтқўии азои воФитми алқёмаҳу қавла : алсмоءи мнФтр бае алсмоءи мншқи бзлки алиўму шиддата . Ва қил : албоءи бмънии фӣ , эй фии злки алиўм . Ва қил « мнФтр ба » эй биллоҳи ъзу ҷли ҳайни инзли субҳонаи фии злли ман алғмому лами иқли мнФтраҳи лони алсмоءи изкру иؤнс . Ва қил : лони алсмоءи фии алмънии алсқФу қил : маъноаи зоти анФтори комаи иқоли амрأаҳи мрзъ эй зоти рзоъи алии алнсбаҳу кони ваъдаи мФъўло эй инҷзи лоўлёӣаҳи мо въду лоъдоӣаҳи мо аўъд . Ва қил : ваъдаи бони изҳри дайнаи алии аддӣни калла .
فَکَیْفَ تَتَّقُونَ إِنْ کَفَرْتُمْ یَوْماً باللّه و لم تؤمنوا عذاب یوم یَجْعَلُ الْوِلْدانَ شِیباً لصعوبته و شدّة اهواله. قیل: هذا علی ضرب المثل، و قیل: بل یصیر الولدان فی القیامة شیبا لما یرون من اهوالها. و قیل: انّما یصیرون شیبا اذا قال اللَّه لآدم: «قم فابعث من ذرّیّتک بعث النّار» فیقول: «یا ربّ من کم کم». فیقول: «من کلّ الف تسع مائة و تسعة و تسعین الی النّار و واحدا الی الجنّة فحینئذ یشیب الولدان من الفزع». و قیل معنی الآیة: کیف لکم بالتّقوی یوم القیامة اذ کفرتم فی الدّنیا ای لا سبیل لکم الی التّقوی اذا وافیتم القیامة و قوله: السَّماءُ مُنْفَطِرٌ بِهِ ای السّماء منشقّ بذلک الیوم و شدّته. و قیل: الباء بمعنی فی، ای فی ذلک الیوم. و قیل «مُنْفَطِرٌ بِهِ» ای باللّه عزّ و جلّ حین ینزل سبحانه فی ظلل من الغمام و لم یقل منفطرة لانّ السّماء یذکّر و یؤنّث. و قیل: لانّ السّماء فی المعنی السّقف و قیل: معناه ذات انفطار کما یقال امرأة مرضع ای ذات رضاع علی النّسبة و کانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا ای ینجز لاولیائه ما وعد و لاعدائه ما اوعد. و قیل: وعده بان یظهر دینه علی الدّین کلّه.
إни ҳзаҳи тазкирае ҳзаҳи алоёти ваъзу ибраи Фмни шоءи атхзи إлии рабаи сбило эй триқои илои ризоаи бтоътаҳи лأмраҳ . Ва алмънӣ : ани улвусули илои тоъотаи мумкину илои маърифатаи лмои насби ман алдлоӣлу асбти ман алшўоҳду анзли ман алоёту алсўр . Ва қил : фӣаи азмору маъноа : Фмни шоءи аллоҳи ани итхзи илои рабаи сбилои атхз . Қавла : إни рбки иълми أнки тқўми أднӣ эй ақал . Ман сулсии аллилу нисфау сулсаи қрأи аҳли Маккау алкўФаҳ : нисфау сулсаи бФтҳи алФоءу алсоءу ишбоъи алҳоءини змо , эйу тқўми нисфау сулсау қрأи алохрўни бксри алФоءу алсоءу ишбоъи алҳоءини ксрои ътФои алии сулсии аллилу тоӣФаҳи ман аллазӣнаи мък яъне алмؤмнину конўои иқўмўни маъаа . Қоли ътоء : ириди лои иФўтаҳи илми мо тФълўни анаи иълми мақодӣр « аллилу алнҳор » Фиълми алқдри алзии тқўмўн .
إِنَّ هذِهِ تَذْکِرَةٌ ای هذه الآیات وعظ و عبرة فَمَنْ شاءَ اتَّخَذَ إِلی رَبِّهِ سَبِیلًا ای طریقا الی رضاه بطاعته لأمره. و المعنی: انّ الوصول الی طاعاته ممکن و الی معرفته لما نصب من الدّلائل و اثبت من الشّواهد و انزل من الآیات و السّور. و قیل: فیه اضمار و معناه: فمن شاء اللَّه ان یتّخذ الی ربّه سبیلا اتّخذ. قوله: إِنَّ رَبَّکَ یَعْلَمُ أَنَّکَ تَقُومُ أَدْنی ای اقلّ. مِنْ ثُلُثَیِ اللَّیْلِ وَ نِصْفَهُ وَ ثُلُثَهُ قرأ اهل مکة و الکوفة: نصفه و ثلثه بفتح الفاء و الثّاء و اشباع الهاءین ضمّا، ای و تقوم نصفه و ثلثه و قرأ الآخرون بکسر الفاء و الثّاء و اشباع الهاءین کسرا عطفا علی ثلثی اللّیل وَ طائِفَةٌ مِنَ الَّذِینَ مَعَکَ یعنی المؤمنین و کانوا یقومون معه. قال عطاء: یرید لا یفوته علم ما تفعلون انّه یعلم مقادیر «اللیل و النهار» فیعلم القدر الّذی تقومون.
Илми أни лни тҳсўаҳи ҳозои насхи аввали алсўраҳ эй илми ани лни ттиқўои қиёми аллили фии алнсФу алслсу алслсин . Фтоби алайкуми ФхФФи алайкуму вазъи ънкми Фоқрؤои мо тисри ман алқуръон эй Фслўои мо хФи алайкуми фии аллили ман алслоаҳ . Қоли алҳсн :у луи қадари ҳалабаи шоҳ ,у қил : Фоқрؤои мо тисри ман алқуръон эй мо аҳббтму ардтми ман алсўри алқсори алтии тқрأи фии салоаи алмғрбу алъшоءи алтии ъдҳои расӯли аллоҳ ( с ) алии маози ириди фии алслоаҳи алноФлаҳ . Ва қил : фии алФрз . Ва қил : хориҷи алслоаҳ . Қоли ибни аббос : мо тисри моӣаҳи ояу қоли Ассадии моӣтои ояу қил : слоси оёти коқсри сӯра .
عَلِمَ أَنْ لَنْ تُحْصُوهُ هذا نسخ اوّل السّورة ای علم ان لن تطیقوا قیام اللّیل فی النّصف و الثّلث و الثّلثین. فَتابَ عَلَیْکُمْ فخفّف علیکم و وضع عنکم فَاقْرَؤُا ما تَیَسَّرَ مِنَ الْقُرْآنِ ای فصلّوا ما خفّ علیکم فی اللّیل من الصّلاة. قال الحسن: و لو قدر حلبة شاة، و قیل: فاقرؤا ما تیسّر من القرآن ای ما احببتم و اردتم من السّور القصار الّتی تقرأ فی صلاة المغرب و العشاء الّتی عدّها رسول اللَّه (ص) علی معاذ یرید فی الصّلاة النّافلة. و قیل: فی الفرض. و قیل: خارج الصّلاة. قال ابن عباس: ما تیسّر مائة آیة و قال السدی مائتا آیة و قیل: ثلاث آیات کاقصر سورة.
Қоли расӯли аллоҳ ( с ) : ани аллоҳи таъолии анзли алоитини ман хотимаи сӯраи албқраҳи ман канзи таҳти алърши ман қрأҳмои фии лайлаи кФтоаҳ
قال رسول اللَّه (ص): انّ اللَّه تعالی انزل الآیتین من خاتمة سورة البقرة من کنز تحت العرش من قرأهما فی لیلة کفتاه
Ва ани Қайси бен ҳозми қол : слити халафи ибни аббоси болбсраҳи Фқрأи фии аввали ркъаҳи болҳмду аввали ояи ман албқраҳи сами қоми фии ассонӣаи Фқрأи болҳмду алоиаҳи ассонӣаи ман албқраҳи сами ркъи Флмои ансрФи ақбли ълинои Фқол : ани аллоҳи таъолии иқўл : Фоқрؤои мо тиср манеҳ . Ва ани инси бен молики анаи самъи расӯли аллоҳ ( с ) иқўл : « ман қрأи хумсин ояи фии явм ӯ фии лайлаи лами иктби ман алғоФлин ва ман қрأи моӣаҳи ояи кутуби ман алқонтин . Ва ман қрأи мотии ояи лами иҳоҷаҳи алқуръони явми алқёмаҳ . Ва ман қрأи хмсмоӣаҳи ояи кутуби ?лаи қнтори ман алоҷр » .
و عن قیس بن حازم قال: صلّیت خلف ابن عباس بالبصرة فقرأ فی اوّل رکعة بالحمد و اوّل آیة من البقرة ثمّ قام فی الثّانیة فقرأ بالحمد و الآیة الثّانیة من البقرة ثمّ رکع فلمّا انصرف اقبل علینا فقال: انّ اللَّه تعالی یقول: فَاقْرَؤُا ما تَیَسَّرَ مِنْهُ. و عن انس بن مالک انّه سمع رسول اللَّه (ص) یقول: «من قرأ خمسین آیة فی یوم او فی لیلة لم یکتب من الغافلین و من قرأ مائة آیة کتب من القانتین. و من قرأ ماتی آیة لم یحاجّه القرآن یوم القیامة. و من قرأ خمسمائة آیة کتب له قنطار من الاجر».
Ва ани абди аллоҳи бен Амри қол : қоли лии расӯли аллоҳ ( с ) : « ақрأи алқуръони фии кули шаҳр » қоли қиллат : ании лои аҷди қувва . Қол : « Фоқрءаҳи фии ъушрин лайла » қол : қиллати ании лои аҷди қувва ? қол : « Фоқрأаҳи фии сабъу лои тизади алии злк » .
و عن عبد اللَّه بن عمرو قال: قال لی رسول اللَّه (ص): «اقرأ القرآن فی کلّ شهر» قال قلت: انّی لا اجد قوّة. قال: «فاقرءه فی عشرین لیلة» قال: قلت انّی لا اجد قوّة؟ قال: «فاقرأه فی سبع و لا تزد علی ذلک».
Сами зикри сабаби алтхФиФ , Фқол : илми أни сикўни мнкми маразии Фишқи алайҳими қиёми аллил . Ва охрўни изрбўни фии алأрз эй исоФрўни фӣҳо .
ثمّ ذکر سبب التّخفیف، فقال: عَلِمَ أَنْ سَیَکُونُ مِنْکُمْ مَرْضی فیشقّ علیهم قیام اللّیل. وَ آخَرُونَ یَضْرِبُونَ فِی الْأَرْضِ ای یسافرون فیها.
Ибтғўни ман фазли аллоҳ эй итлбўни ман ризқи аллоҳи болтҷораҳу охрўни иқотлўни фии сиблати аллоҳи Фсўии байни дараҷаи алмҷоҳдину алмктсбини алмоли ллнФқаҳи алӣ нафсау алии алъёлу алоҳсону алоФзол . Рӯй иброҳӣми ани ибни масъӯди қол : ?имаи раҷули ҷалби шиӣои илои Мадинаи ман мадоини алмуслимӣни соброи мҳтсбои Фбоъаҳи бсъри явмаи кон ?ла ъанд аллоҳи манзалаи алшҳдоءи сами қрأи абди аллоҳ :у охрўни изрбўни фии алأрзи ибтғўни ман фазли аллоҳу охрўни иқотлўни фии сиблати аллоҳу ани ибни умри қол : мо халқи аллоҳи ъзу ҷли мўтаҳи амўтҳои баъди алқтли фии сиблати аллоҳи аҳби алтии ман ани амўти байни шъбтии раҷули азрби фии аларзи абтғии ман фазли аллоҳ .
یَبْتَغُونَ مِنْ فَضْلِ اللَّهِ ای یطلبون من رزق اللَّه بالتّجارة وَ آخَرُونَ یُقاتِلُونَ فِی سَبِیلِ اللَّهِ فسوّی بین درجة المجاهدین و المکتسبین المال للنّفقة علی نفسه و علی العیال و الاحسان و الافضال. روی ابراهیم عن ابن مسعود قال: ایّما رجل جلب شیئا الی مدینة من مدائن المسلمین صابرا محتسبا فباعه بسعر یومه کان له عند اللَّه منزلة الشّهداء ثمّ قرأ عبد اللَّه: وَ آخَرُونَ یَضْرِبُونَ فِی الْأَرْضِ یَبْتَغُونَ مِنْ فَضْلِ اللَّهِ وَ آخَرُونَ یُقاتِلُونَ فِی سَبِیلِ اللَّهِ و عن ابن عمر قال: ما خلق اللَّه عزّ و جلّ موتة اموتها بعد القتل فی سبیل اللَّه احبّ الّتی من ان اموت بین شعبتی رجل اضرب فی الارض ابتغی من فضل اللَّه.
Фоқрؤои мо тиср манеҳ эй ман алқуръони ттўъои ҳсҳми алии алттўъи болтҳҷди трғибоу насхи аФтрозаҳи трФиҳо .
فَاقْرَؤُا ما تَیَسَّرَ مِنْهُ ای من القرآن تطوّعا حثّهم علی التّطوّع بالتّهجّد ترغیبا و نسخ افتراضه ترفیها.
Ва أқимўои алслоаҳи ҳозои насхи салоаи аллили болслоаҳи алхмс . Ва отўои алзкоаҳи алқсаҳи ллслўаҳу локини лами иФрқи байни алқринтину أқрзўои аллоҳи қрзои ҳуснои кули мо иъбди аллоҳи ъзу ҷл ба қарз ллъбд ъанд аллоҳ . Ва мо тқдмўои лأнФскми ман хайр эй мо тслФўаҳи лонФскми ман амали солеҳу садақа . Тҷдўаҳ ъанд аллоҳ эй тҷдўо савоба ъанд аллоҳи ҳўи хирои лаками ман матоъи алднё ,у қил : хирои лаками ман алшҳу алтқсиру хирои насби мафъӯли сони лқўлаҳ : « тҷдўаҳ ,у дахлати ҳўи Фсло . «у أъзми أҷро » лони аллоҳи таъолии иътии алмؤмни аҷраи бғири ҳисобу астғФрўои аллоҳи ман тақсиру занби вақъи мнкми إни аллоҳи ғафури лмни тоб « раҳим » лмни астғФр .
وَ أَقِیمُوا الصَّلاةَ هذا نسخ صلاة اللّیل بالصّلاة الخمس. وَ آتُوا الزَّکاةَ القصّة للصّلوة و لکن لم یفرّق بین القرینتین وَ أَقْرِضُوا اللَّهَ قَرْضاً حَسَناً کلّ ما یعبد اللَّه عزّ و جلّ به قرض للعبد عند اللَّه. وَ ما تُقَدِّمُوا لِأَنْفُسِکُمْ مِنْ خَیْرٍ ای ما تسلفوه لانفسکم من عمل صالح و صدقة. تَجِدُوهُ عِنْدَ اللَّهِ ای تجدوا ثوابه عند اللَّه هُوَ خَیْراً لکم من متاع الدّنیا، و قیل: خیرا لکم من الشّحّ و التّقصیر و خیرا نصب مفعول ثان لقوله: «تجدوه، و دخلت هو فصلا. «وَ أَعْظَمَ أَجْراً» لانّ اللَّه تعالی یعطی المؤمن اجره بغیر حساب وَ اسْتَغْفِرُوا اللَّهَ من تقصیر و ذنب وقع منکم إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ لمن تاب «رَحِیمٌ» لمن استغفر.
Ани алҳорс бен сӯед қол : қоли абди аллоҳ : қоли расӯли аллоҳ ( с ) : « аикми молаи аҳби илайҳи ман моли вориса » ? қолўо : ё расӯли аллоҳи мо мнои ман аҳади алои молаи аҳби илайҳи ман моли ворисаи қол : « аъмлўои мо тқўлўн » қолўо : мо наилм алои злк ё расӯли аллоҳи қол : « мо мнкми раҷули алои моли ворисаи аҳби илайҳи ман молаи қолўои Киев ё расӯли аллоҳ ? қол : « анмои моли аҳад кам мо қадаму моли ворисаи мо ахр
عن الحارث بن سوید قال: قال عبد اللَّه: قال رسول اللَّه (ص): «ایّکم ماله احبّ الیه من مال وارثه»؟ قالوا: یا رسول اللَّه ما منّا من احد الّا ماله احبّ الیه من مال وارثه قال: «اعملوا ما تقولون» قالوا: ما نعلم الّا ذلک یا رسول اللَّه قال: «ما منکم رجل الّا مال وارثه احبّ الیه من ماله قالوا کیف یا رسول اللَّه؟ قال: «انّما مال احد کم ما قدّم و مال وارثه ما اخّر
Ва астғФрўои аллоҳи ман знўбкми إни аллоҳи ғафури раҳим » .
وَ اسْتَغْفِرُوا اللَّهَ من ذنوبکم إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِیمٌ».