Дило чунин магар аз манъи ёр май гузарӣ
دلا چنین مگر از منع یار میگذری
Ки дардмандӣу осӯдаи вор май гузарӣ
که دردمندی و آسودهوار میگذری
Чунин ки барзадае чобуконаи домани ноз
چنین که برزدهای چابکانه دامن ناز
Сӯии кадоми сияҳи рӯзгор май гузарӣ
سوی کدام سیهروزگار میگذری
зи бими таъна , ба ҳар куҷо рӯй , ба ҳаркии рисӣ
ز بیم طعنه، به هر کجا روی، به هرکه رسی
Чу офтоб , саросемаи вор май гузарӣ
چو آفتاب، سراسیمهوار میگذری
Ба васли ғайр , гумон расӣданами дорӣ
به وصل غیر، گمان رسیدنم داری
Ки май рисӣ ба ману шармсор май гузарӣ
که میرسی به من و شرمسار میگذری
Надонам ин з фиребаст ё зи ҷазбаи ишқ
ندانم این ز فریب است یا ز جذبه عشق
Ки ҳар дамам ба раҳи интизор май гузарӣ
که هر دمم به ره انتظار میگذری
зи ханҷари мижау тири ғамза маълум аст
ز خنجر مژه و تیر غمزه معلوم است
Ки баҳри куштани майлии зор май гузарӣ
که بهر کشتن میلیّزار میگذری