Дар къбтини ишқи ту нақш мурод нест

در کعبتین عشق تو نقش مراد نیست

Вази шшдри ғами ту умед кушод нест

وز ششدر غم تو امید گشاد نیست

Дар дашти шавқи бас ки ба сари барадам , он чунон

در دشت شوق بس که به سر بردم، آن چنان

Гуми гашти номи ман ки марои ҳам ба ёд нест

گم گشت نام من که مرا هم به یاد نیست

Додеми ҷону дили зи хами зулф ӯ нараст

دادیم جان و دل ز خم زلف او نرست

Мардему кори бастаи моро кушод нест

مردیم و کار بسته ما را گشاد نیست

Аз бас ки нам гирифт замини зоб дида ам

از بس که نم گرفت زمین زآب دیده‌ام

Дар водии балои асар аз гирдбод нест

در وادی بلا اثر از گردباد نیست

Майлӣ ба ноМуродии ишқи ту ҷони супурд

میلی به نامرادی عشق تو جان سپرد

Гуё ба боғи ишқ , ниҳол мурод нест

گویا به باغ عشق، نهال مراد نیست