Умрӣ ар Мӯсои козими зи ҷафои мсҷўн буд
عمری ار موسی کاظم ز جفا مسجون بود
Дар садафи гавҳари баҳри азимати макнун буд
در صدف گوهر بحر عظمت مکنون بود
Мазҳари ғайби масӯн буду ҳиҷоби азалӣ
مظهر غیب مصون بود و حجاب ازلی
Исми аъзами зи нахуст аз ҳамаи каси мхзўн буд
اسم اعظم ز نخست از همه کس مخزون بود
Моҳи канъони бад ва шуд гоҳи таназзул дар чоҳ
ماه کنعان بُد و شد گاه تنزل در چاه
ё ки зиндони шиками моҳӣ ва ӯ зўолнўн буд
یا که زندان شکم ماهی و او ذوالنون بود
Козими алғиз ки бо сабру шкибоӣӣ ӯ
کاظم الغیظ که با صبر و شکیبائی او
Сабри Айюб чаҳ як қатра ки бо Ҷайҳун буд
صبر ایوب چه یک قطره که با جیحون بود
Пуртӯй буд ки тобед аз ин нури ҷамол
پرتوی بود که تابید از این نور جمال
Он таҷаллӣ ки дили Мӯсо аз ӯ мафтӯн буд
آن تجلی که دل موسی از او مفتون بود
Пӯр умрон накашид ончӣ ки Мӯсои зи рашид
پور عمران نکشید آنچه که موسی ز رشید
Зулми фиръавн на ҳамчун ситами ҳорӯн буд
ظلم فرعون نه همچون ستم هارون بود
Пой дар силсилаи сари силсилаи ишқи ниҳод
پای در سلسله سر سلسلۀ عشق نهاد
Лайлии ҳасани азалро зи азали мафтӯн буд
لیلی حسن ازل را ز ازل مفتون بود
Санадӣ ар заҳри ситами рехти бкомш чаҳ аҷаб
سندی ار زهر ستم ریخت بکامش چه عجب
Талхии коми вай аз талхии заҳри афзӯн буд
تلخی کام وی از تلخی زهر افزون بود
Аз рутаби сӯхтаи Мӯсо чаҳ зи ангури ризо
از رطب سوخته موسی چه ز انگور رضا
Нахли ваҳдати самараши миваи гӯногӯн буд
نخل وحدت ثمرش میوۀ گوناگون بود
Кас надонист дар он ҳол ки ҳолаш чун гашт
کس ندانست در آن حال که حالش چون گشت
Ғмгсори вайу ғмпрўри вай , бичўн буд
غمگسار وی و غمپرور وی، بیچون بود
Гар бмтмўраҳи ғарибонаи бҷонон ҷон дод
گر بمطموره غریبانه بجانان جان داد
Дили бегонау хеш аз ғам ӯ пари хӯн буд
دل بیگانه و خویش از غم او پر خون بود
Шаҳнаи шаҳр агар шуҳра намӯдаш чун меҳр
شحنۀ شهر اگر شهره نمودش چون مهر
Лек аз бори ғамаши фалаки фалаки машҳун буд
لیک از بار غمش فُلک فلک مشحون بود