Ман шефтау масту хароб аз ғами ёрам
من شیفته و مست و خراب از غم یارم
Ҳайрону ҷигари сӯхта аз ҳиҷр нигорам
حیران و جگر سوخته از هجر نگارم
Гар ёри маро боз нахонд ба сари хеш
گر یار مرا باز نخواند به سر خویش
Ман хӯни ҷигар дар ғамаш аз дида ба боРом
من خون جگر در غمش از دیده به بارم
Савганд бидон аҳд ки бо зулфи ту бастам
سوگند بدان عهد که با زلف تو بستم
Ҷуз бар сари зулфат ба касе дили нспорм
جز بر سر زلفت به کسی دل نسپارم
ё раби сабабии соз ки бози он хами гесу
یا رب سببی ساز که باز آن خم گیسو
Як рӯз ба чанги орму ҷонро ба сипорам
یک روز به چنگ آرم و جان را به سپارم
эй кош ки бози он шӯхи парии чеҳра ӣ танноз
ای کاش ، که آن شوخ پری چهره ی طنّاز
Боз ояд ва чун моҳ , нишинад ба канорам
باز آید و چون ماه، نشیند به کنارم