Ғайр магузор ки дар базм ту ояд густох
غیر مگذار که در بزم تو آید گستاخ
Гарм суҳбат шавад ва бо ту даройади густох
گرم صحبت شود و با تو درآید گستاخ
Дар фарибандаи суханҳо чу дамади боди фусун
در فریبنده سخنها چو دمد باد فسون
Бурқаъ аз чеҳраи шарми ту кушояди густох
برقع از چهرهٔ شرم تو گشاید گستاخ
Ба нигоҳи ту чу аз лутф бишорат ёбад
به نگاه تو چو از لطف بشارت یابد
Ба ишорати зи лабат бӯса рибоед густох
به اشارت ز لبت بوسه رباید گستاخ
Дасти ҷуръат чу кушояди зи хаёлоти ғалат
دست جرات چو گشاید ز خیالات غلط
Дастёзӣ ба хаёли ту намояди густох
دستیازی به خیال تو نماید گستاخ
Он ки пинҳон кунадат саҷда чу май бо ту кашад
آن که پنهان کندت سجده چو می با تو کشد
Ояду рух ба кафи пой ту сояд густох
آید و رخ به کف پای تو ساید گستاخ
Ҳаст шоистаи файзи назари поки бутӣ
هست شایستهٔ فیض نظر پاک بتی
Ки назар дар Рахш аз бим нишоед густох
که نظر در رخش از بیم نشاید گستاخ
Муҳташами булбули боғ ту шуд аммо на чунон
محتشم بلبل باغ تو شد اما نه چنان
Ки дар андешаи гул нағма сарояд густох
که در اندیشهٔ گل نغمه سراید گستاخ