Аз ҷайби ҳасани сарви қадии сар бадар накард
از جیب حسن سرو قدی سر بدر نکرد
Каз хиҷлати ту хоки мазаллат ба сар накард
کز خجلت تو خاک مذلت به سر نکرد
Барқи аҷал ба хирмании оташ назд далел
برق اجل به خرمنی آتش نزد دلیل
То машварат ба хуии ту бидодгар накард
تا مشورت به خوی تو بیدادگر نکرد
Чашмати зи гӯшае изки ғамзаи сари надод
چشمت ز گوشهای یزک غمزه سر نداد
Каз гӯша дигар сипаҳи фитна сар накард
کز گوشه دگر سپه فتنه سر نکرد
Дар базм кас намонад ки пинҳони зи дигарон
در بزم کس نماند که پنهان ز دیگران
Аз наргисаши нишонаи тир назар накард
از نرگسش نشانه تیر نظر نکرد
То муддаии зи абрӯӣ ӯ чашм бар надошт
تا مدعی ز ابروی او چشم بر نداشت
Тирӣ аз он камон ба дили ман гузар накард
تیری از آن کمان به دل من گذر نکرد
Баради он чунон дилам ки нахустин нигоҳ ро
برد آن چنان دلم که نخستین نگاه را
Дар дилбарии мадад ба нигоҳ дигар накард
در دلبری مدد به نگاه دگر نکرد
Сад ишва кард чашми ту зойеъ барои ғайр
صد عشوه کرد چشم تو ضایع برای غیر
Коташ ба ҷон ман заду даравӣ асар накард
کاتش به جان من زد و دروی اثر نکرد
Тири киришмаи ту ки бо дил ба ҷанг буд
تیر کرشمه تو که با دل به جنگ بود
Кард оштии чунон ки марои ҳам хабар накард
کرد آشتی چنان که مرا هم خبر نکرد
Қонеъ нашуд ба ним нигоҳи ту муҳташам
قانع نشد به نیم نگاه تو محتشم
Хошоки ним сӯзи зи оташ ҳазар накард
خاشاک نیمسوز ز آتش حذر نکرد