Захми нигаҳат наҳуфта хӯрдам

زخم نگهت نهفته خوردم

Пинҳони нигаҳӣ дигар ки мардум

پنهان نگهی دگر که مردم

Шуд ақлу замон мастӣ омад

شد عقل و زمان مستی آمد

Худро ба ту ин замони супурдам

خود را به تو این زمان سپردم

Тир нигаҳам задӣ чу пинҳон

تیر نگهم زدی چو پنهان

Роҳӣ ба навозиши ту барадам

راهی به نوازش تو بردم

Май гашти лабами хизоб агар дӯш

می‌گشت لبم خضاب اگر دوش

Домани гуҳи гиря май фишурдам

دامن گه گریه می‌فشردم

Аз захми аҷали кушандатар буд

از زخم اجل کشنده‌تر بود

Аз дасти ту зарбатӣ ки хӯрдам

از دست تو ضربتی که خوردم

Дил бе ту шабӣ ки доғ май сӯхт

دل بی‌تو شبی که داغ می‌سوخت

То субҳи ситора май шимурдам

تا صبح ستاره می‌شمردم

эй ҳам дами муҳташам дар ин базм

ای هم دم محتشم در این بزم

Соф аз ту ки ман ҳарифи дардам

صاف از تو که من حریف دردم