зи дида дар дилам эй сарви дил рибо биншин
ز دیده در دلم ای سرو دل ربا بنشین
Нишеманӣаст зи мардуми тиҳӣ биё биншин
نشیمنی است ز مردم تهی بیا بنشین
Ту шоҳи ҳасанӣу хилват сарой туаст дилам
تو شاه حسنی و خلوت سرای توست دلم
Ҳазор сол ба давлати дарин саро биншин
هزار سال به دولت درین سرا بنشین
Ду манзиланд дилу дида ҳар ду хонаи ту
دو منزلند دل و دیده هر دو خانهٔ تو
Чаҳ ҳоҷатаст ки ман гӯямат куҷо биншин
چه حاجتست که من گویمت کجا بنشین
Ту моҳи маҷлиси мо шӯ ба сад тараби гӯи шамъ
تو ماه مجلس ما شو به صد طرب گو شمع
Ба гӯшае рӯу зории кунони з мо биншин
به گوشهای رو و زاری کنان ز ما بنشین
Хушаст суҳбати шоҳу гадо ба хилвати инс
خوشست صحبت شاه و گدا به خلوت انس
Ту шоҳи муҳтарамӣ бо ман гадо биншин
تو شاه محترمی با من گدا بنشین