Гар ҳамин хӯни маро ёр хӯрд нӯшаши бод

گر همین خون مرا یار خورد نوشش باد

Вар на андешаи бедоди фаромӯшаши бод

ور نه اندیشه بیداد فراموشش باد

Шуд шаби тор агар рӯзи ман аз шоми хаташ

شد شب تار اگر روز من از شام خطش

Рӯзи равшани шабам аз субҳи биногвашаши бод

روز روشن شبم از صبح بناگوشش باد

Карда аз ҷилваи басии перҳани сабри қабо

کرده از جلوه بسی پیرهن صبر قبا

Ҷони фидои равиши сарви қабои пӯшиши бод

جان فدای روش سرو قبا پوشش باد

Бар сари ин даст ки ҳар шаби з фироқаш дорам

بر سر این دست که هر شب ز فراقش دارم

Шабии умед ки то субҳ дар оғӯшаши бод

شبی امید که تا صبح در آغوشش باد

Чаҳ шавад маст ва кунад майл ки хӯнами нӯшад

چه شود مست و کند میل که خونم نوشد

Хӯни ман дар қадаҳи лаъли қадаҳи нӯшаши бод

خون من در قدح لعل قدح نوشش باد

Гуфтамаш гӯши бофасонаи ағёри мада

گفتمش گوش به افسانه اغیار مده

Гавҳари панди ман умед ки дар гӯшаши бод

گوهر پند من امید که در گوشش باد

Муддаӣ кист ки аз шаҳд лабаш гирад ком

مدعی کیست که از شهد لبش گیرد کام

Нешҳо дар ҷигар аз ҳасрати он нӯшаши бод

نیش‌ها در جگر از حسرت آن نوشش باد

Сад сухани наргис гуёаш бмн дорад низ

صد سخن نرگسِ گویاش به من دارد نیز

Сухании қисматам аз ғунчаи хомӯшаши бод

سخنی قسمتم از غنچه خاموشش باد

Дар қадаҳи дӯш май аз хӯн дилам кард ва бихӯрад

در قدح دوش می از خون دلم کرد و بخورد

Сархуши имшаб ки илоҳии з май дӯшаши бод

سرخوش امشب که الهی ز می دوشش باد

Гарчи бо ман сухан аз ноз нагӯяд муштоқ

گرچه با من سخن از ناز نگوید مشتاق

Тарафи ҳарфи лабам бо лаби хомӯшаши бод

طرف حرف لبم با لب خاموشش باد