Ману поси тири ҷафоӣ ӯ ки мабод бар ҷгарӣ расад

من و پاس تیر جفای او که مباد بر جگری رسد

Ки з ғайритем кашад он ситам ки зи дӯст бар дгарӣ расад

که ز غیرتم کشد آن ستم که ز دوست بر دگری رسد

Талабии нигини висол ӯ ба кафи ӣнқадари з чаҳ муддаӣ

طلبی نگین وصال او به کف اینقدر ز چه مدعی

Гуҳарии чунин на сазо буд ки ба чун ту бдгҳрӣ расад

گهری چنین نه سزا بود که به چون تو بدگهری رسد

Ҳамаи булбулону сурӯди хуши ману нолае ки дарин чаман

همه بلبلان و سرود خوش من و ناله‌ای که درین چمن

зи сирояташи ду се қатрае зи дилӣ ба чашм тарӣ расад

ز سرایتش دو سه قطره‌ای ز دلی به چشم تری رسد

Бинишон зи бӯсаи оташи дили ташнаи коми висоли худ

بنشان ز بوسه آتش دل تشنه‌کام وصال خود

Чаҳ зиёни диҷлаи зи қатрае ки ба оташин ҷгарӣ расад

چه زیان دجله ز قطره‌ای که به آتشین‌جگری رسد

Накунам талаби зи ҷҳими ҳам китарӣ зи чашми терми барад

نکنم طلب ز جحیم هم که تری ز چشم ترم برد

Ки аён буд чаҳ ба қулзумии зи ҳарорат шарарӣ расад

که عیان بود چه به قلزمی ز حرارت شرری رسد

зи ту шуҳраам чаҳ ба шаҳру кӯча ниҳон кунам ғамат аз аду

ز تو شهره‌ام چه به شهر و کوچه نهان کنم غمت از عدو

Ба касе ки шқ шудаи пардааш чаҳ зарари зи парда дарӣ расад

به کسی که شق شده پرده‌اش چه ضرر ز پرده‌دری رسد

Ту ки боғи пургулу мивае чаҳ таматтуъ аз ту ки ҳичгаҳ

تو که باغ پرگل و میوه‌ای چه تمتع از تو که هیچگه

На ба булбулони зи ту накҳатӣ на ба боғбон самарӣ расад

نه به بلبلان ز تو نکهتی نه به باغبان ثمری رسد

Шудаи рӯзгори ман ин чунин зи ғамати сиёҳ ва ним ғамин

شده روزگار من این چنین ز غمت سیاه و نیم غمین

Нарасад зи даври фалаки шабӣ ки на аз пеш саҳарӣ расад

نرسد ز دور فلک شبی که نه از پیش سحری رسد