Зони мубталои ҳиҷрати ъушрат талаб набошад
زآن مبتلای هجرت عشرت طلب نباشد
Каз паии шаби ғаматро рӯз тараб набошад
کز پی شب غمت را روز طرب نباشد
Саргарми оташи ишқ дар ҳеҷ шаб набошад
سرگرم آتش عشق در هیچ شب نباشد
Гӯ то буруз чун шамъ дар тоб ва таб набошад
گو تا بروز چون شمع در تاب و تب نباشد
Ғайр аз диёри ишқу ҷузи кӯй маҳвашон нест
غیر از دیار عشق و جز کوی مهوشان نیست
Ҷоӣӣ ки рӯз набӯд онҷо ки шаб набошад
جائی که روز نبود آنجا که شب نباشد
Дарди талаб гараш ҳаст толиб расад бмтлўб
درد طلب گرش هست طالب رسد بمطلوب
Гӯ дар раҳи ту моро пой талаб набошад
گو در ره تو ما را پای طلب نباشد
Нахлӣ ки коми талхӣ ширин нагардад аз вай
نخلی که کام تلخی شیرین نگردد از وی
Ҳосил чаҳ зин ки бориши ғайр аз рутаб набошад
حاصل چه زین که بارش غیر از رطب نباشد
Базми рақиби равшани давр аз ту тира ӣнҷост
بزم رقیب روشن دور از تو تیره اینجاست
Ҷоӣӣ ки нуру зулмат аз рӯз шаб набошад
جائی که نور و ظلمت از روز شب نباشد
Дар кишвари муҳаббати ъушрати мҷу ки онҷо
در کشور محبت عشرت مجو که آنجا
Соз ва нишот набӯд барг ва тараб набошад
ساز و نشاط نبود برگ و طرب نباشد
Афкан бадваст муштоқи карт ки ғайритаслим
افکن بدوست مشتاق کارت که غیرتسلیم
Аз бандаи пеши мавлои шарт адаб набошад
از بنده پیش مولا شرط ادب نباشد