Дили зорам ба ин зорӣ ки менолад зи озораш

دل‌زارم به این زاری که می‌نالد ز آزارش

Дил хоро шавад хӯни шунӯдгар нолаи зораш

دل خارا شود خون شنود گر ناله زارش

Чаҳ бокам аз шикасти болу пар дар қайди сайёдӣ

چه باکم از شکست بال و پر در قید صیادی

Ки озодӣ нахоҳад аз қафаси мурғи гирифтораш

که آزادی نخواهد از قفس مرغ گرفتارش

Бар он гулбун ба умед чаҳ мурғии ошёни бандад

بر آن گلبن به امید چه مرغی آشیان بندد

Ки хӯн андалебӣ мечакад аз нӯк ҳар хораш

که خون عندلیبی می‌چکد از نوک هر خارش

Фиканда дар саводи аъзамии ишқам ки аз зулмат

فکنده در سواد اعظمی عشقم که از ظلمت

Гурезади меҳру ма аз рӯзи торику шаби тораш

گریزد مهر و مه از روز تاریک و شب تارش

Фиғони коФкндаҳ дар дорушшифоеи ишқи ранҷурам

فغان کافکنده در دارالشفایی عشق رنجورم

Ки доим дар суроғ шарбат маргаст бемораш

که دایم در سراغ شربت مرگست بیمارش

Фурӯғ меҳр меҷӯям аз он маи содаи лавҳии байн

فروغ مهر می‌جویم از آن مه ساده‌لوحی بین

Ки бо аҳли вафо ҳаргиз набошад ҷузи ҷФокорш

که با اهل وفا هرگز نباشد جز جفاکارش

Чисон хӯнам наризад каз шароби нози чашм ӯ

چسان خونم نریزد کز شراب ناز چشم او

Сияҳи мастии сети ханҷар бар кафи мижгони хунхораш

سیه‌مستی‌ست خنجر بر کف مژگان خونخوارش

Нанолад булбули озурдаи дил чун дар гулистонӣ

ننالد بلبل آزرده دل چون در گلستانی

Ки фарқ аз ҳам надорад дар дили озории гулу хораш

که فرق از هم ندارد در دل‌آزاری گل و خارش

Чунон муштоқ раст аз қайди дайн дар доми куфри охир

چنان مشتاق رست از قید دین در دام کفر آخر

Ки на бошад хаёли сбҳаҳаш на фикри зуннораш

که نه باشد خیال سبحه‌اش نه فکر زنارش