Бҷони зи андешаи ғайриомадами зи он анҷуман рафтам

بجان ز اندیشه غیرآمدم ز آن انجمن رفتم

Биорон суҳбат ӯ боди арзонӣ ки ман рафтам

بیاران صحبت او باد ارزانی که من رفتم

Мукофот шукуфтан нест осон оқибат дидӣ

مکافات شکفتن نیست آسان عاقبت دیدی

Ки чун гули зин гулистон рафтаму хунин кафан рафтам

که چون گل زین گلستان رفتم و خونین کفن رفتم

Басар дар ғурбат омад умраму номад барам пайкӣ

بسر در غربت آمد عمرم و نامد برم پیکی

Магари якборагӣ аз ёди ёрон ватан рафтам

مگر یکبارگی از یاد یاران وطن رفتم

Рӯм гуфт аз ?бирт бихўд фитодам зин сухан бингар

روم گفت از برت بیخود فتادم زین سخن بنگر

Ки ӯ норафта ман рафтам вале аз хештан рафтам

که او نارفته من رفتم ولی از خویشتن رفتم

Чаҳ ҳосил сабз шудгар Кувайт аз серобии ашкам

چه حاصل سبز شد گر کویت از سیرابی اشکم

Ки ман бо домании пурхори ҳасрат аз чаман рафтам

که من با دامنی پرخار حسرت از چمن رفتم

Нашуд зи он лаби насибами бӯсаи ҳаргизи фиғони кохр

نشد ز آن لب نصیبم بوسه هرگز فغان کاخر

зи ҳасрати талхи ком аз Кувайти аиширин даҳан рафтам

ز حسرت تلخ‌کام از کویت ایشیرین‌دهن رفتم

Дилам дар сина дорад нолаи зорӣ ки нишнидам

دلم در سینه دارد ناله زاری که نشنیدم

зи ёқӯб ар чаҳ сад раҳ бар дар байт алҳзн рафтам

ز یعقوب ار چه صد ره بر در بیت‌الحزن رفتم

Чаҳ миннатгар каманди турра ӯ дастгирам шуд

چه منت گر کمند طره او دستگیرم شد

Ки беруни танаи лаби охир аз он чоҳ зқн рафтам

که بیرون تنه لب آخر از آن چاه ذقن رفتم

Нарафт аз ҳасрати ширини лабии кас аз ҷаҳони ҳаргиз

نرفت از حسرت شیرین لبی کس از جهان هرگز

Ба ин ҷон кандан талхӣ ки ман чун кӯҳкан рафтам

به این جان کندن تلخی که من چون کوهکن رفتم

Чаҳ сӯдор буд сад рангами сухани муштоқ каз гетӣ

چه سودار بود صد رنگم سخن مشتاق کز گیتی

Дар охири ғунчаи сон меҳр хамӯшӣ бар даҳан рафтам

در آخر غنچه‌سان مهر خموشی بر دهن رفتم