Ба ғурбати Юсуфи ман ба зиндони ватани монда

به غربت یوسف من به زندان وطن مانده

Писар гум кардае дар гӯшаи байти алҳзни монда

پسر گم کرده‌ای در گوشه بیت‌الحزن مانده

Ҳалолаши бод бо ёрони ғурбати ъушрат ар гоҳе

حلالش باد با یاران غربت عشرت ار گاهی

Касе ояд ба ёд ӯро ки бекас дар ватани монда

کسی آید به یاد او را که بی‌کس در وطن مانده

Чаҳ созам гарна аз худ даври азуи қолаби тиҳии созам

چه سازم گرنه از خود دور ازو قالب تهی سازم

Чаҳ кор ояд марои ин зиндагии ҷони рафтаи тани монда

چه کار آید مرا این زندگی جان رفته تن مانده

Нахоҳам давр аз он гул зист имрӯзаст ё фардо

نخواهم دور از آن گل زیست امروز است یا فردا

Ки холии ошёни андалебӣ дар чамани монда

که خالی آشیان عندلیبی در چمن مانده

Бтиғи фурқатами кишт ва наомад бар сари хокам

بتیغ فرقتم کشت و نیامد بر سر خاکم

Ғуборӣ дар дилаш гуё аз ин хунини кафани монда

غباری در دلش گویا از این خونین کفن مانده

Касе каз фурқати ширини лабӣ ҷон дода медонад

کسی کز فرقت شیرین لبی جان داده میداند

Чаҳ талхӣ то қиёмат дар мазоқи кӯҳкани монда

چه تلخی تا قیامت در مذاق کوهکن مانده

Хумори ҳасрати оради бодаи таҳи шишаи мисатон ро

خمار حسرت آرد باده ته شیشه مستان‌را

Биринҷами давр аз он зини ним ҷонӣ дар бадани монда

برنجم دور از آن زین نیم‌جانی در بدن مانده

Забони хомаи Фрсўд ва ҳанузам аз ғами ҳиҷрон

زبان خامه فرسود و هنوزم از غم هجران

Ба дили сад гуфтугӯи муштоқ ва бар лаби сад сухани монда

به دل صد گفتگو مشتاق و بر لب صد سخن مانده