Дар чамани ҷӯрӣ ки аз боди хазон бар гули гузашт
در چمن جوری که از باد خزان بر گل گذشت
Интиқоми он ситам бошад ки бар булбули гузашт
انتقام آن ستم باشد که بر بلبل گذشت
Карда мурғони чаманро ғайраташи ошуфтаи ҳол
کرده مرغان چمن را غیرتش آشفته حال
Бозпндории сабо бар турраи сунбули гузашт
بازپنداری صبا بر طره سنبل گذشت
Зери об аз гиря ам набӯд кунун тоқи сипеҳр
زیر آب از گریهام نبود کنون طاق سپهر
Борҳои сайли сршгм аз сари ин пули гузашт
بارها سیل سرشگم از سر این پل گذشت
Дар чамани он булбул афсурдаам каз дили маро
در چمن آن بلبل افسردهام کز دل مرا
Барнаёмад нолаи зорӣу фасли гули гузашт
برنیامد ناله زاری و فصل گل گذشت
Аз ҷафои хори мурғони қафас осӯда анд
از جفای خار مرغان قفس آسودهاند
Оҳ аз он меҳнат ки дар гулзор бар булбули гузашт
آه از آن محنت که در گلزار بر بلبل گذشت
Тарк олам ояд аз муштоқ чун ояд баҳор
ترک عالم آید از مشتاق چون آید بهار
Аз сари паймонаи натавонад ба фасли гули гузашт
از سر پیمانه نتواند به فصل گل گذشت