Сӯии ғурбати он бути худкоми маҳмили баст ва рафт
سوی غربت آن بت خودکام محمل بست و رفت
Турфаи шаҳбозии маро аз доми ғофили ҷуст ва рафт
طرفه شهبازی مرا از دام غافل جست و رفت
Пой ман бурноед аз гул варна дар роҳи талаб
پای من برناید از گل ورنه در راه طلب
Сӯии манзили раҳравӣ ҳар гом аз гул раст ва рафт
سوی منزل رهروی هر گام از گل رست و رفت
На дили моро ҳамин аз неши ғами афкори сохт
نه دل ما را همین از نیش غم افکار ساخت
Ҳар тарафи ани сару сими андоми сад дил хаст ва рафт
هر طرف ان سر و سیم اندام صد دل خست و رفت
Гар ҳиҷоб аз диданаш монеъ набӯдаш пас чаро
گر حجاب از دیدنش مانع نبودش پس چرا
Сохт пеши чеҳраи глФоми ҳоили даст ва рафт
ساخت پیش چهره گلفام حایل دست و رفت
Гар набӯд аз бодаи имшаби саргарон бо ман чаро
گر نبود از باده امشب سرگران با من چرا
Гашт дар базми ман нокоми дохили маст ва рафт
گشت در بزم من ناکام داخل مست و رفت
Рехти хӯнамро ва бар хокам фиканд афғон ки сохт
ریخت خونم را و بر خاکم فکند افغان که ساخت
Аз раҳи кинам чу нақши гоми қотили паст ва рафт
از ره کینم چو نقش گام قاتل پست و رفت
Аз камандаши ҷустӣ ва шуд вирди муштоқи ин сухан
از کمندش جستی و شد ورد مشتاق این سخن
Турфаи шаҳбозии маро аз доми ғофили ҷуст ва рафт
طرفه شهبازی مرا از دام غافل جست و رفت