Манам ки доғи азизон ҳар диёрами сӯхт
منم که داغ عزیزان هر دیارم سوخت
Фалаки зотши даврии ҳазор боРоми сӯхт
فلک زآتش دوری هزار بارم سوخت
зи давряти манам он раҳи талаб ба кӯии фано
ز دوریت منم آن رهطلب به کوی فنا
Ки доғи ҳасрати шамъи сари мазорами сӯхт
که داغ حسرت شمع سر مزارم سوخت
Чу ман дар оташ овораге насузад кас
چو من در آتش آوارگی نسوزد کس
Ба санги ҳасрати осоиши шарорами сӯхт
به سنگ حسرت آسایش شرارم سوخت
Маро чаҳ шикваи зи барқи он гиёҳи ташнаи лабам
مرا چه شکوه ز برق آن گیاه تشنه لبم
Ки доғи ҳасрати борони навбаҳорами сӯхт
که داغ حسرت باران نوبهارم سوخت
зи гармии ту ба ағёр чун сапанд бибин
ز گرمی تو به اغیار چون سپند ببین
Ки сӯхти оташи рашк ва чаҳ бе қарорами сӯхт
که سوخت آتش رشک و چه بیقرارم سوخت
Туро нишаст ба доман сазад ки аз туфи рашк
تو را نشست به دامن سزد که از تف رشک
Ба ёди кӯии ту омезиши ғуборами сӯхт
به یاد کوی تو آمیزش غبارم سوخت
зи хок шуъла зад оҳами пас аз вафот ин аст
ز خاک شعله زد آهم پس از وفات این است
Сипеҳри сифлаи чароғӣ ки бар мазорами сӯхт
سپهر سفله چراغی که بر مزارم سوخت
Дарин риёзи ман он бе насиби гулчинам
درین ریاض من آن بینصیب گلچینم
Ки давр дидани гулҳо ба шохсорами сӯхт
که دور دیدن گلها به شاخسارم سوخت
Манам ба хоки тапони моҳӣ эй ки давр аз об
منم به خاک تپان ماهیای که دور از آب
Фалак дар оташи ҳиҷрони ҷӯйборами сӯхт
فلک در آتش هجران جویبارم سوخت
Биё бар оташам аз бӯса бизан обӣ
بیا بر آتشم از بوسه بزن آبی
Ки доғи ҳасрати он лаъли обдорми сӯхт
که داغ حسرت آن لعل آبدارم سوخت
Маро чаҳ шикваи зи оташ чу хорўхси муштоқ
مرا چه شکوه ز آتش چو خاروخس مشتاق
Ки барқи ҷилваи он оташини изорами сӯхт
که برق جلوه آن آتشین عذارم سوخت